
प्रोपर्टी बूम बनाने के लिए खेला था खेल
#property boom इलाके में नई कॉलोनियों और मार्केट बनाने का खेल व्यापक स्तर चला, इसमें जिम्मेदार अधिकारियों की अहम भूमिका रही। प्राइवेट कॉलोनाइजरों को पनपाने के लिए अफसरों ने आंख मींच कर यह पूरा खेल खेला था। यहां तक कि राज्य सरकार की ओर से नगर विकास न्यास क्षेत्र में मास्टर प्लान में शिक्षण संस्थाओं के लिए आरक्षित की गई भूमि का भू उपयोग परिवर्तन करने के लिए न्यास प्रशासन ने कॉलोनाइजरों और जनप्रतिनिधियों के दबाव में नियम कायदोें की अनदेखी कर दी। शहर के आसपास कृषि भूमियों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने के लिए भवन या कॉलोनी या मार्केट संचालित सिलसिला थमा नहीं। जिस भूमि पर कॉमर्शियल की मनाही थी, वहां भी नियम कायदों को दरकिनार कर मंजूरी देने में देर नहीं की और रातों रात मार्केट बनाने की मंजूरी तक दी गई। न्यास में जिन अधिकारियों को भूमि का भू रूपान्तरण का अधिकार मिला था, उन्होंने भी सिर्फ सिफारिश को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। नतीजन यह हुआ कि प्रदेश की राजधानी जयपुर के बाद प्रोपर्टी में इस इलाके में एकाएक बूम आ गया। यहां उद्योग धंधे नहीं होने के बावजूद नई कॉलोनियों और मार्केट बनाने के लिए कॉलोनाइजरों में होड़ सी मच गई।
इस बीच, न्यास प्रशासन की ओर से जांच कमेटी ने जिन 89 कॉलोनियों और कॉमर्शियल भूखंड के मालिकाना हक संबंधित संदेह के दायरे में आने पर भू उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को दूषित मानते हुए न्यास अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी गई। जिन 89 प्रोपर्टी के संबंध में सूची मांगे जाने पर न्यास के नियमन शाखा का कहना था कि सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगने की सलाह दी। इस शाखा के अलावा एटीपी शाखा ने भी आमजन को सूचना देने से इंकार कर दिया। इन दोनों शाखा के प्रभारी अधिकारियों का कहना था कि यहां से सूचना किसी भी स्तर पर नहीं दी जाती। जबकि कई कॉलोनाइजरों के यहां पूरी सूची पहुंच गई हैं।
हाईकोर्ट में याचिका दायर से मची खलबली
निकुंज विहार कॉलोनी निवासी अधिवक्ता वरूण गुप्ता ने यूआईटी प्रशासन को लिखित में शिकायत की थी। इसमें आरोप लगाया कि कृषि भूमि िस्थत चक 3 ए में एक कॉलोनी काटने के लिए रिद्धी सिदि़ध होम डवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आवेदन न्यास में किया गया था, यह भूमि मास्टर प्लान में शिक्षण संस्था के लिए आरक्षित दर्शाई गई थी। लेकिन यह कंपनी ने यह भूमि कॉमर्शियल गतिविधियां संचालित करने के लिए भू उपयोग परिवर्तन कराने की प्रक्रिया अपनाने का दावा किया। इस संबंध में जब हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई तो इस भूमि के भू रूपान्तरण के संबंध में एक समाचार पत्र में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित होने का जवाब दिया जबकि यह सूचना संबंधित समाचार पत्र में प्रकाशन नहीं हुई। इसकी शिकायत फिर न्यास और सदर थाने में दी गई तब सुनवाई नहीं हुई। इस कानूनी प्रक्रिया शुरू होने पर कॉलोनाइजरों में खलबली मच गई। इस संबंध में न्यास ने अपने ही अधिकारियों की एक जांच कमेटी बनाकर खुद के अफसरों को क्लीन चिट दे दी। हाईकोर्ट में यह मामला अब भी विचाराधीन हैं।
Published on:
02 Dec 2023 06:01 pm
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