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SriGanganagar छात्रा को प्रेम जाल में फंसाया और किया अगवा, अब दस साल की सजा

Girl student trapped in love trap and kidnapped, now sentenced to ten years- अनूपगढ़ क्षेत्र में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली किशोरी का अपहरण और दुष्कर्म करने का मामला

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श्रीगंगानगर। अनूपगढ़ थाना क्षेत्र में पांच साल पहले आठवीं कक्षा में अध्ययनरत छात्रा को अपने प्रेम जाल में फंसा और अगुवाकर उससे दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने एक आरोपी को दोषी मानते हुए दस साल कठोर कारावास व एक लाख बीस हजार रुपए जुर्माने की सजा से दंडित किया है। यह निर्णय पोक्सो एक्ट प्रकरणों की स्पेशल कोर्ट संख्या दो के विशिष्ट न्यायाधीश अरुण कुमार अग्रवाल ने सुनाया।
विशिष्ट लोक अभियोजक नवप्रीत कौर ने बताया कि पीडि़ता के भाई ने 22 मार्च 2017 को अनूपगढ़ थाना में मामला दर्ज कराया था। उसने बताया कि बीती रात 21 मार्च 17 को उसके पिता खेत की रखवाली के लिए घर से चले गए और उसकी मां और अन्य परिजन एक कमरे में जाकर सो गए। अगले दिन उठे तो उसकी बहन गायब मिली। आसपास पता किया तो मंगला नाम के व्यक्ति उसकी बहन को अगवा कर ले गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच की। पुलिस ने पीडि़ता को रामदेवरा से दस्तयाब किया और आरोपी मंगला उर्फ रतनलाल को काबू किया।

आरोपी नई मंडी घड़साना क्षेत्र चक 3 आरजेडी संसारदेसर निवासी 24 वर्षीय रतनलाल पुत्र बुधराम मेघवाल को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ चालान पेश किया। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकारा उसने पीडि़ता को शादी का झांसा देकर अपने प्रेम जाल में फंसाया और 21 मार्च 17 की रात को घर से अगवा कर ले गया। रास्ते में गांव पतरोड़ा के पास उससे शारीरिक संबंध बनाए।

इसके बाद वह अपने मित्र रामलाल उर्फ रामा को बुलाया और पीडि़ता को रिश्तेदार की बेटी बताकर परिचय कराया। अपने मित्र के बाद वह रामदेवरा होटल में जाकर रुक गया। इस बीच आरोपी के मित्र रामलाल ने शक होने पर रामदेवरा पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने होटल में छापा मारा तो वहां यह किशोरी और आरोपी दोनों मिल गए।
इधर, अदालत ने घड़साना क्षेत्र चक 3 आरजेडी संसारदेसर निवासी रतनलाल पुत्र बुधराम मेघवाल को दोषी मानते हुए आईपीसी की धारा 363 और धारा 366 में पांच-पांच साल कठोर कारावास व दस-दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं आईपीसी की धारा 376 में दस साल कठोर कारावास व पचास हजार रुपए जुर्माना और पोक्सो एक्ट की धारा 3 व 4 में सात साल कठोर कारावास व पचास हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना राशि जमा नहीं होने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने पीडि़ता को प्रतिकर राशि देने के भी निर्देश दिए।

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