
न्यास और पंचायत में उलझी ग्रीन वैली
श्रीगंगानगर.
'ग्रीन वैली सिटी' नाम सुनते ही जेहन में तस्वीर उभरती है वह होती है हरियाली भरी वादियों की लेकिन शहर से सटे ग्रामीण अंचल गांव छह जैड 'ए' में आबाद कॉलोनी में ऐसा कुछ भी नहीं है। इस कॉलोनी में समस्याओं के अंबार है। करीब दो-तीन गलियों में बंटी इस कॉलोनी में प्रवेश के लिए मुख्यद्वार और मुख्य मार्ग बेहद सामान्य है। कॉलोनी में प्रवेश के लिए पदमपुर मार्ग पर नाम चर्चा घर के पास से एक सड़क जाती है।
इस सड़क पर डामर बेहद कम है। प्रवेशद्वार से ही सटा एक रिसोर्ट है लेकिन इसके आगे घरों में रह रहे लोग परेशानियों से घिरे हैं। इस कॉलोनी के सामने की तरफ मैट्रो सिटी है और दोनों के बीच की सड़क कॉलोनी में प्रवेश का मुख्य मार्ग है। यह जगह-जगह से टूटा है। इसका डामर लगभग गायब हो चुका है। यहां से दाईं तरफ की तीन गलियों में बसी है ग्रीन वैली सिटी।
कर रहे हैं प्रयास
कॉलोनी में कुछ समस्याएं हैं। इन्हें दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें पानी का संकट आदि समस्याएं हैं इन्हें दूर करने के लिए कॉलोनाइजर से संपर्क किया गया है।
मस्तान सिंह, अध्यक्ष, ग्रीन वैली सिटी कॉलोनी
हमारे अधीन तो हो
ग्रीन वैली सिटी हमारी ग्राम पंचायत के अंतिम छोर पर है। यह गैर आबादी क्षेत्र है। यहां पानी का संकट प्रमुख है। हमारा वाटर वक्र्स बारह जैड में है, वहां से यहां तक पानी पे्रशर से नहीं पहुंच पाता।
रवींद्र कुमार, सरपंच, ग्राम पंचायत दस जैड
अब तक अप्रूव्ड ही नहीं
ग्राम पंचायत दस जैड के गांव छह जैड 'एÓ क्षेत्र में बसी यह कॉलोनी अब तक यूआईटी से अप्रूव्ड नहीं है। ऐसे में जहां एक ओर यहां यूआईटी कोई विकास कार्य नहीं करवा रही। वहीं, ग्राम पंचायत की नजर में यह गैर आबादी क्षेत्र है। अब यूआईटी और ग्राम पंचायत दोनों ने कॉलोनी को फुटबॉल बना रखा है। यहां रह रहे लोग न तो यूआईटी के पास समस्या लेकर जा सकते हैं और न ही पंचायत के पास।
कॉलोनी यूआईटी से अप्रूव्ड ही नहीं है। इसके लिए इलाके के लोगों ने फाइलें लगा रखी हैं। सर्वे भी हो गया है लेकिन अब तक अप्रूवल नहीं हुआ है। महावीर प्रसाद, दुकानदार
इलाके की समस्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा। इसके लिए लोगों को खुद ही प्रयास करने होंगे। हमने पानी निकासी आदि के बारे में कई बार प्रयास किया लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
मनवीर कौर, गृहणी
यहां पानी का संकट है। हम लोग सामान्य परिवारों के हैं, टैंकर से पानी तो लगातार ले नहीं सकते। ऐसे में हम आखिर करें तो क्या करें। यहां बोरवैल तो हैं लेकिन उसका पानी खारा है और यह उपयोगी नहीं हो पाता।
चरणजीत कौर, गृहणी
घर तक पानी पहुंचता ही नहीं है। इसके लिए कई बार प्रयास कर लिए लेकिन पानी बेहद कम ही कॉलोनी तक आता है। यह मिलता भी है तो बेहद कम दबाव से। वीरपाल कौर, गृहणी
हमारे यहां पानी पीने के लिए भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता है। सामान्य परिवार हैं तो टैंकर से पानी घरों तक लाना भी परेशानी भरा है। इसके लिए पैसे लगा नहीं सकते।
मनीराम नायक, इलाका निवासी
Published on:
25 Sept 2017 06:48 am
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