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कंकरीट के नीचे दबी पार्कों की हरियाली

-शहर के अधिकांश पार्कों में इंटरलोकिंग टाइल्स और पक्के निर्माण -हाइकोर्ट के आदेशों की भी पालना नहीं-घूमने वालों को नहीं मिल रही ताजा हवा

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कंकरीट के नीचे दबी पार्कों की हरियाली

श्रीगंगानगर.

शहर में हरियाली का एक मात्र विकल्प बचे उद्यानों को खत्म करने में सरकारी मशीनरी भी पीछे नहीं है। विकास के नाम पर लोगों के घूमने और ताजा हवा लेने की जगह पर कब्जा किया जा रहा है। शहर के नामचीन उद्यानों में कंकरीट और व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने की तैयारी है। इलाके में तीन दिनों से लगातार उमस भरी गर्मी का दौर है, पर्यावरणविद इसका कारण हरियाली कम होना मान रहे हैं और उद्यान खत्म करने के लिए नगर परिषद और नगर विकास न्यास प्रशासन को जिम्मेदार मान रहे हैं।

एक मोटे आकलन के अनुसार हर पांच साल में नगर परिषद बोर्ड करीब बारह से पन्द्रह करोड़ रुपए का बजट तो पार्कों में सौन्दर्यीकरण की आड़ में खर्च कर देता है। इससे पार्क की हरियाली समाप्त हो रही है। कई पार्कों में दूध के बूथ के नाम पर व्यावासयिक गतिविधियां संचालित होने लगी हैं। उद्यानों का बड़ा हिस्सा कंकरीट में तब्दील किया जा चुका है। पार्कों की हरियाली समाप्त करने के संबंध में राजस्थान हाईकोर्ट भी नाराजगी व्यक्त कर चुका है, लेकिन धरातल पर हाईकोर्ट के आदेशों की पालना नहीं हो रही है।


बना दिया जनसभा स्थल
पुरानी आबादी के महिला पार्क में पक्केमंच का निर्माण इतना अधिक कर दिया है कि इसकी सुंदरता ही समाप्त कर दी गई है। यह पार्क अब 'बड़े मंच वाला पार्क' के नाम से अधिक जाना जाता है। मंच भी इस कदर बनाया गया है कि यह पार्क कम और जनसभा स्थल अधिक प्रतीत होता है। इलाके के नागरिकों ने इसका विरोध भी किया था, लेकिन परिषद अधिकारियों ने एक न सुनी।


वाटर वक्र्स टंकी ने बिगाड़ी दशा
डी ब्लॉक स्थित पार्क में बनाई गई वाटरवक्र्स की टंकी ने इतनी जगह घेर ली है कि यह पार्क 'टंकी वाला पार्क' के नाम से जाना जान लगा है। नगर परिषद प्रशासन ने इस पार्क के रखरखाव और वहां सौन्दर्यीकरण के नाम पर कितना बजट खर्च किया है, यह तो परिषद को भी पता नहीं। रही-कही कसर अब परिषद प्रशासन ने यहां स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत शौचालयों का निर्माण करवा पूरी कर दी है।


नौकायान के नाम पर निर्माण
जवाहरनगर स्थित इंदिरा वाटिका में वर्ष 2003 में बच्चों के लिए नौकायान की सुविधा शुरू करने का सब्जबाग दिखाया गया। इस पार्क का अधिकांश हिस्सा नौकायान के पक्के निर्माण में तब्दील हो चुका है, लेकिन नौकायान सुविधा महज तीन महीने के बाद बंद कर दी गई थी। अब इस स्थल को लावारिस छोड़ दिया गया है। इस स्थल पर बच्चे क्रिकेट खेलते हैं तो कई लोग इसमें गंदगी डालते हैं।


इंटरलोकिंग टाइल्स का जाल
विनोबा बस्ती एरिया के सबसे बड़े पार्क में कुछ साल पहले हरियाली इतनी अधिक थी कि यहां दूर-दूर से लोग आते थे। स्कूली बच्चे पार्क को पिकनिक स्पॉट के रुप में इस्तेमाल करते थे। लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों ने पार्क के सौन्दर्यीकरण के नाम पर इतनी इंटरलोकिंग टाइल्स बिछा दी हैं कि वहां अब घास की बजाय इंटरलोङ्क्षकंग टाइल्स अधिक नजर आती हैं।

नियमों को दिखाया ठेंगा
नियमानुसार पार्क जिस साइज का है, उसमें सिर्फ पांच प्रतिशत एरिया में ही पक्का निर्माण हो सकता है। नियमों की मानें तो 95 प्रतिशत एरिया हरियाली के लिए विकसित होगा। शहर के पचास वार्डों में अब तक लगभग 100 पार्क बने हैं। इसमें से अधिकांश पार्कों में वाटर वक्र्स की टंकी, टीन शेड, मंच का निर्माण, शौचालय, मूत्रालय, दूध का बूथ, माली का आवास जैसे पक्के निर्माण कराए जा चुके हैं।


नहीं हो सकते पक्के निर्माण
हर पार्क हरियाली स्थल है, लेकिन वहां पक्के निर्माण नहीं हो सकते। मेरे कार्यकाल से पहले पार्कों में ऐसे निर्माण हुए हैं। अब नया निर्माण नहीं हो सकता। इस संबंध में हाईकोर्ट की गाइडलाइन भी जारी हुई है, अब उसकी पालना कराई जाएगी।
सुनीता चौधरी, आयुक्त, नगर परिषद, श्रीगंगानगर।