
श्रीगंगानगर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने शहर में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने नगर परिषद को निर्देश दिए हैं कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों को पकड़कर हटाने के लिए आवश्यक कदम तुरंत उठाए जाएं। यह आदेश जस्टिस कुलदीप माथुर की बेंच ने भागवंती देवी बनाम राज्य सरकार व अन्य की याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि नगर परिषद के कर्मचारी जब भी आवारा कुत्तों को पकड़ने का प्रयास करते हैं, तो कई बार स्थानीय निवासी रोक-टोक करते हैं और कार्रवाई में बाधा डालते हैं। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नगर परिषद के कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए आवारा कुत्तों को पकड़ने और हटाने का काम करें। यदि किसी व्यक्ति या स्थानीय निवासी की ओर से इस कार्य में बाधा आती है, तो संबंधित कर्मचारियों को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने और कानूनी कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता होगी। न्यायालय ने राज्य सरकार को मामले में विस्तृत जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और मामले को चार सप्ताह बाद पुनः सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।
जल्द शुरू होगी आवारा कुत्तों की नसबंदी
शहर में बढ़ते आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के संकेत है। उपखंड अधिकारी एवं नगर परिषद के कार्यवाहक आयुक्त नयन गौतम ने बताया कि नगर परिषद ने शहर में आवारा कुत्तों की धरपकड़ और नसबंदी के लिए एक एनजीओ को टेंडर दिए हैं। इस ठेकेदार के साथ नगर परिषद का एग्रीमेंट संभवतः बुधवार या गुरुवार तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद ही ठेकेदार की ओर से श्वानों की नसबंदी की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने स्वीकारा कि संयुक्त कमेटी का शिष्टमंडल मंगलवार को उनके पास आया था और संबंधित कार्य योजना पर चर्चा की थी।
नसबंदी मुहिम अटकने पर जताई नाराजगी
इस बीच, शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और प्रशासन की ढिलाई के खिलाफ मंगलवार को डॉग कंट्रोल कमेटी और जागरूक नागरिकों ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर (सतर्कता) रीना छिम्पा और एसडीएम एवं नगर परिषद आयुक्त नयन गौतम से वार्ता कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। कमेटी संयोजक महेश पेड़ीवाल ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बताया कि जब नसबंदी के टेंडर और आदेश जारी हो चुके हैं, तो धरातल पर काम शुरू क्यों नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। उन्होंने बताया कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर लगातार हमले हो रहे हैं। कई लोग घायल हो चुके हैं और रेबीज के मामलों में भी वृद्धि देखी जा रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है। कमेटी ने आरोप लगाया कि पूर्व में नसबंदी के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
Published on:
07 Apr 2026 11:36 pm
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