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होर्डिंग्स से लाखों की कमाई बिचौलियों की जेब में

शहर में होर्डिंग के लिए अधिकृत सवा सौ साइट है जबकि अनधिकृत भी इतनी ही है। कुल मिलाकर करीब ढाई सौ साइटों पर होर्डिंग लगाने की होड़ मची रहती है।

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श्रीगंगानगर.

शहर में होर्डिंग के लिए अधिकृत सवा सौ साइट है जबकि अनधिकृत भी इतनी ही है। कुल मिलाकर करीब ढाई सौ साइटों पर होर्डिंग लगाने की होड़ मची रहती है। पिछले छह माह से नगर परिषद ने तीन बार होर्डिग्स की बोली लगाई लेकिन ठेकेदारों की मांग के अनुरूप बात नहीं बनी तो बोली को स्थगित कर दिया गया।


परिषद के कार्मिकों से लेकर ठेकेदारों के कारिन्दे इस खेल में शामिल है। प्रभावशाली लोगों ने होर्डिंग्स ठेके को कमाई का जरिया बना लिया है। नगर परिषद को होर्डिग्स ठेके से सालाना करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपए की आय होती है। इतनी ही कमाई ठेकेदार करते हैं। लेकिन पिछले साल एक ठेका कंपनी ने ठेकेदारों के पूल से बाहर जाकर बोली लगाने की स्पर्धा करते हुए खुद ठेका ले लिया। यह ठेका करीब एक करोड़ 90 लाख रुपए का था लेकिन खजाने में आए महज नब्बे लाख रुपए।

इनमें से भी नकद तो सिर्फ बाईस लाख रुपए ही मिले। शेष उधारी में है। बकाया राशि जमा नहीं होने पर जब परिषद प्रशासन ने नोटिस देने की प्रक्रिया की तो इस ठेका कंपनी ने राशि चुकाने की बजाय हाईकोर्ट से स्टे ले लिया। ऐसे में ठेका अवधि समाप्त होने के बाद संबंधित साइट के लिए नगर परिषद किराया साप्ताहिक, पाक्षिक, मासिक के रूप में वसूल कर रही है।


ऐसे निकाला कमाई का जरिया
होर्डिग्स लगाने का ठेका नहीं होने पर अब कई ठेकेदार बिचौलिए बन गए हैं। इन बिचौलियों ने प्रचार प्रसार के लिए होर्डिंग्स साइट किराए पर ले ली। अधिकृत साइट पर सरकारी विज्ञापन लगाने से संबंधित ठेकेदार या बिचौलियों को किराए से छूट मिलती है, ऐसे में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराने के बाद दो दिन में संबंधित सरकारी विज्ञापन हटाकर वहां प्राइवेट कंपनी का विज्ञापन लगा दिया जाता है।


अनधिकृत साइट से मोटी कमाई
अधिकृत साइट के एवज में किराया नगर परिषद को चुकाना पड़ता है लेकिन अनधिकृत साइट से पूरे विज्ञापन का पैसा खुद डकार रहे हैं। बांस या लकड़ी की बल्लियों के सहारे लगने वाले होर्डिंग अनधिकृत साइट की श्रेणी में है। ऐसे विज्ञापन अधिकांश धार्मिक संगठनों या धार्मिक स्थल या जनप्रतिनिधियों की शुभकामनाएं देने के लिए लगाए जाते थे लेकिन अब कॉमर्शियल गिितिवधियों के लिए भी लगने लगे हैं।


परिषद को किराया चुकाने के बाद कुछ राशि बचती थी लेकिन प्रतिस्पर्धी ठेकेदारों ने बिना किराया चुकाए होर्डिंग्स लगाने शुरू कर दिए हैं। ऐसे में बिचौलिए प्रभावशाली राजनीतिक लोगों के चहते बने हुए हैं। हमने सारे होर्डिंग्स उतार कर परिषद प्रशासन से हिसाब किताब कर लिया है।


गुरजीत सिंह वालिया, होर्डिग्स ठेका फर्म के संचालक।
होर्डिंग्स ठेका नहीं होने के पीछे बड़े-बड़े प्रभावशालियों ने पूरा खेल खेला है। परिषद के अधिकारी भी इस ड्रामेबाजी के हिस्सेदार बनकर मूकदर्शक की भूमिका निभा रहे है। सभापति के नजदीकी लोग सक्रिय है ताकि पुल बनाकर सस्ते रेट पर यह ठेका खुद ले सके।
अजय दावड़ा लक्की, उपसभापति नगर परिषद।


एक-एक रुपए का हिसाब किताब
साइट को किराये पर देने का एक-एक रुपए का हिसाब रखा जा रहा है। इसके बावजूद कोई बिचौलिया बनकर कमाई कर रहा है तो समझ से परे है। एक एक साइट की बकायदा फोटोग्राफी कराई जाती है। कुछ लोग प्रतिस्पर्धा के कारण बेबुनियाद आरोप
लगा रहे हैं।
मिलखराज चुघ, राजस्व अधिकारी, नगर परिषद।