
श्रीगंगानगर। राज्य सरकार ने मकान और जमीन पर बढ़ाई गई डीएलसी रेट को लागू कर दी गई है. अब इलाके में मकान और जमीन खरीदना महंगा होगा। शहरी इलाकों में पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग की ओर से डीएलसी रेट दस से तीस फीसदी तक बढ़ गई है। डीएलसी की दरें शहर के ब्लॉक एरिया में सबसे ज्यादा हैं जबकि सबसे कम पुरानी आबादी एरिया की हैं। मालिकाना हक के लिए दुकान या मकान की रजिस्ट्री कराने से डीएलसी की दरें अलग अलग निर्धारित की हैं। इससे सरकार का स्वत: ही खजाना भी भरने लग जाएगा। सबसे ज्यादा डीएलसी की दरें शहर के ब्लॉक एरिया में हुई हैं जबकि सबसे कम पुरानी आबादी एरिया की हैं। मालिकाना हक के लिए दुकान या मकान की रजिस्ट्री कराने से डीएलसी की दरें अलग अलग निर्धारित की हैं। इससे सरकार का स्वत: ही खजाना भी भरने लग जाएगा।
डीएलसी की दरें निर्धारित करने के लिए छह माह पहले जिला प्रशासन के साथ बैठक हुई थी लेकिन पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग राजस्व अर्जित करने के लिए सरकार ने डीएलसी की दरों में यह बढ़ोत्तरी की हैं। इलाके में भले ही प्राइवेट बड़ी कॉलोनियों में भूखंड साठ लाख रुपए से लेकर एक करोड़ रुपए की कीमत में बिक रहे है जबकि इन भूखंडों की रजिस्ट्री महज दस लाख रुपए औसत में हो रही है। इसकी बड़ी वजह डीएलसी की दरें हैं।
प्राइवेट कॉालोनाइजरों की जनप्रतिनिधियों और आला अफसरों से सीधी एप्रोच होने के कारण इनकी अधिकृत कॉलोनियों में जानबूझकर डीएलसी की दरें कम रखी जाती है। यही वजह है कि इलाके में पोश कॉलोनियों में डीएलसी दर शुल्क और रजिस्ट्री का खर्चा नगर विकास न्यास की अधिकृत कॉलोनियों से काफी कम आ रहा है। तहसील कार्यालय में प्राइवेट कॉलोनियों की रजिस्ट्री लगातार हो रही है, इसका प्रत्यक्ष् फायदा कॉलोनाइजर उठा रहे है। इलाके में बड़ेबड़े उद्योगपतियों और व्यापारियों ने रियल एस्टेट में निवेश किया है।
चुनिंदा कॉलोनियों का डीएलसी की दरों का आंकलन किया तो पॉश कॉलोनियों के भूखंड धारकों की रजिस्ट्री होने तक मोटा मुनाफा संबंधित कॉलोनाइजर की जेब में चला गया जबकि नगर विकास न्यास सहित अन्य कॉलोनियों में भूखंड की रजिस्टी महंगी दर पर हुई । भूखंड खरीद से लेकर मालिकाना हक पाने तक सारा खर्चा सरकार के खजाने में गया।
डीएलसी की दरों की विसंगतियों के कारण सरकारी कॉलोनियों में रजिस्ट्री करवाने के लिए भूखंडधारकों को जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ती है। भूखंड खरीद से लेकर रजिस्ट्री तक सारा धन सरकार के खजाने में जमा होता है जबकि प्राइवेट कॉलोनियों में भूखंड महंगी दर से खरीद करने के बावजूद वहां डीएलसी कीदर कम होने पर भूखंडधारकों को रजिस्ट्री के लिए मामूली रकम चुकानी पड़ती है।
कॉलोनी का नाम आवासीय व्यवसायिक
पहले अब पहले अब
जवाहरनगर 1100 1350 3520 3600
ब्लॉक एरिया 1831 2350 6000 9000
रवीन्द्र पथ 640 3000 7700 9000
गोल बाजार 2530 3300 3595 4950
पुरानी आबादी 341 350 1897 2025
रिदि्ध सिदि्ध प्रथम 605 900 2227 3000
सेतिया काॅलोनी 594 675 1210 1300
पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग की ओर से प्रति फुट दरें
यदि आप जवाहरनगर क्षेत्र में 25 गुणा 50 साइज का खाली भूखंड खरीदकर मालिकाना हक पाना चाहते है तो करीब दस लाख रुपए का खर्चा आएगा। यदि यही भूखंड काॅमर्शियल है तो तीस लाख रुपए का खर्च हो सकेगा। इसी प्रकार ब्लॉक एरिया में इस साइज के भूखंड के लिए 14 से 15 लाख रुपए खर्च करने पड़ेंगे, यही कॉमर्शियल के रूप में इस्तेमाल कराने के लिए रजिस्ट्री करवाना चाहते है तो यह करीब चालीस लाख रुपए खर्च हो सकेगा। यदि आप नाथांवाला जैसे ग्रामीण इलाके में पचास लाख रुपए प्रति बीघा भूमि खरीद रहे है तो करीब चार लाख रुपए की रजिस्ट्री का शुल्क देना होगा।
उप पंजीयक श्याम सुंदर बेनीवाल ने बताया कि पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग ने डीएलसी की दरों में इजाफा किया गया हैं। रजिस्ट्री कराने के लिए अब शहरी क्षेत्र में 10 से 28 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में यह पच्चीस प्रतिशत का इजाफा किया हैं। इससे सरकार को राजस्व प्राप्तियां हो सकेगी। पिछले बार के मुकाबले इस बार डीएलसी की दरों में मामूली बदलाव किया है।
Updated on:
03 Dec 2024 12:13 am
Published on:
03 Dec 2024 12:12 am
