
water storage
घड़साना.
तापमान बढऩे के साथ पानी की खपत अधिक होने तथा वाटरवक्र्स की डिग्गियों में पेयजल भण्डारण समाप्त होने की कगार के चलते 17 जलयोजनाओं क्षेत्र के गांव चकों व ढाणियों में पेयजल संकट हो गया है। पानी की विकराल समस्या नहीं बने, इससे पहले प्रशासन ने प्रभावित सभी गांवों में पेयजल स्थिति का निरीक्षण कर जिला प्रशासन को रिर्पोट दी है।
उपखंड अधिकारी श्योराम वर्मा, तहसीलदार चंदनमल सैन, जलदाय विभाग कनिष्ठ अभियंता सुनील चौपड़ा ने रोजड़ी, केएचएम, एसएलडी नहर वितरिकाओं अधीन आने वाली पेयजल योजनाओं का मौके पर जाकर निरीक्षण किया। एसडीएम वर्मा ने बताया कि रोजड़ी व एसएलडी वितरिका के करीब सौ गांव एवं चक पानी संकट से प्रभावित है। कई गांवों में पेयजल की स्थिति गंभीर है। इन गांवों में पेयजल भण्डारण पांच-सात दिनों की खपत का ही बचा है।
एसडीएम ने पेयजल स्थिति को देखते हुए तत्काल प्रभाव से दस वाटरवक्र्सों से गांव, चकों आदि में होने वाली नियमिति आपूर्ति को बंद करा दिया है। वहीं सात-आठ योजनाओं से पेयजल आपूर्ति का अन्तराल चार अथवा पांच दिन बाद कराने के निर्देश जलदाय विभाग को दिए है। एसडीएम ने वाटरवक्र्स डिग्गियों से पेयजल घरों में खपत के लिए टेंकर भरने पर रोक लगा दी है। विवाह शादी कार्यक्रम के लिए भी वाटरवक्र्स डिग्गी से पानी भरने के बजाय निजी नलकूपों से लेने के लिए कहा गया है। प्रशासन ने जिला प्रशासन से सिंचाई विभाग द्वारा नहरबंदी में आपातकालीन स्थिति के संरक्षित पानी आरजेडी वितरिका में प्रवाहित करने का आग्रह भी किया है।
नलकूप लगाने का निर्णय
इधर जलदाय विभाग कनिष्ठ अभियंता एसके चौपड़ा ने बताया कि एसडीएम के आदेशों पर पेयजल संकट वाले आरजेड़ी, एसएलडी, केएचएम, केडब्ल्यूएम, आरजेएम आदि वितरिका क्षेत्र के गांवों में मीठे पानी स्थल पर नलकूप लगाने का निर्णय लिया है। वहीं पूर्व में निजी तौर खेतों में लगे मीठे पानी के नलकूपों को किराये पर लेने की कार्रवाही शुरू की है। पेयजल संकट का मुख्य कारण नहरबंदी से आठ दस दिन पहले पानी मिला था। जो कि पन्द्रह बीस दिन की खपत का पानी था। पूरे क्षेत्र में पेयजल संकट के लिए विभाग नजर रखे हुए है।
Published on:
13 Apr 2018 07:28 pm

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