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गिरी हॉस्पिटल को 72 घंटे के लिए चिकित्सा विभाग ने किया सीज, 10 हजार रुपए का जुर्माना वसूला

सीज करने से पहले हॉस्पिटल कराया गया सैनेटाइज्ड

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गिरी हॉस्पिटल को 72 घंटे के लिए चिकित्सा विभाग ने किया सीज, 10 हजार रुपए का जुर्माना वसूला

गिरी हॉस्पिटल को 72 घंटे के लिए चिकित्सा विभाग ने किया सीज, 10 हजार रुपए का जुर्माना वसूला

श्रीगंगानगर. चिकित्सा विभाग की टीम की ओर से शहर में मीरा चौक के आगे स्थित गिरी हॉस्पिटल में जांच के दौरान अवैध रूप से कोविड मरीजों का इलाज करने, रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने के मामले मामला पकड़ा था। जिसकी जांच रिपोर्ट कलक्टर को सौंपी थी। कलक्टर ने कार्रवाई के लिए रिपोर्ट सीएमएचओ को सौंप दी थी। इसको लेकर गुरुवार शाम को चिकित्सा विभाग की टीम ने गिरी हॉस्पिटल को 72 घंटे के लिए सीज कर दिया है।

इससे पहले हॉस्पिटल को सैनेटाइज्ड कराया था। टीम ने इस मामले में संचालक से दस हजार रुपए का जुर्माना वसूल किया है। आपदा एवं महामारी अधिनियम के तहत अधिकृत चिकित्सक के खिलाफ एफआईआर नहीं हो सकती।
चिकित्साकर्मियों ने बताया कि सोमवार को गिरी हॉस्पिटल में चिकित्सा विभाग की टीम की ओर से हुई कार्रवाई की रिपोर्ट सीएमएचओ व टीम की ओर से मंगलवार शाम तक तैयार कर ली गई। शाम को जांच रिपोर्ट को जिला कलक्टर को सौंप दिया था।

रिपोर्ट में आपदा एवं महामारी अधिनियम के तहत हॉस्पिटल संचालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की अनुशंषा की गई थी। यह रिपोर्ट बुधवार को कलक्टर की ओर से वापस सीएमएचओ को आगे की कार्रवाई के लिए सौंप दी गई थी। इस पर कानूनी सलाह आदि के बाद सीएमएचओ डॉ. गिरधारीलाल मेहरडा व टीम मौके पर पहुंची और गिरी हॉस्पिटल को सैनेटाइज्ड करवाकर 72 घंटे के लिए सील कर दिया गया है। वहीं हॉस्पिटल संचालक से दस हजार रुपए का जुर्माना वसूला किया गया।

सीएमएचओ ने बताया कि आपदा व महामारी अधिनियम के तहत किसी अधिकृत चिकित्सक के खिलाफ एफआईआर नहीं हो सकती है। इसलिए सीज करने व जुर्माने की कार्रवाई की गई।
इससे पहले दोपहर को आईएमए के चिकित्सक भी सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे थे और सीएमएचओ से मुलाकात की थी।


दो मरीजों की हो गई मौत
- चिकित्साकर्मियों ने बताया कि गिरी हॉस्पिटल से दो दिन में दो मरीजों को राजकीय चिकित्सालय में रैफर किया गया था। जिसकी हालत बिगड़ी हुई थी। इनमें से राजकीय चिकित्सालय में एक मरीज की भर्ती करने के करीब एक घंटे बाद उनकी मौत हो गई। वहीं दूसरे मरीज की भी इलाज के दौरान मौत हुई थी। वहां भर्ती मरीजों के सैंपल में कई कोरोना पॉजिटिव मिले थे। इसके बाद यह कार्रवाई की गई है।


यह था मामला
- चिकित्साकर्मियों के अनुसार सूचना के बाद चिकित्सा टीम ने गिरी हॉस्पिटल का निरीक्षण किया था। जहां अवैध रूप से कोविड मरीजों का इलाज चलता पाया गया। जबकि यह बच्चों का हॉस्पिटल है। जहां सात मरीज भर्ती थे।

मरीजों की फाइल देखी गई तो उसमें सीटी स्कोर 15 से 20 तक मिला। जबकि उनकी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट नहीं थी। यह अस्पताल कोविड मरीजों के लिए अधिकृत नहीं है। इसके बाद भी यहां कम सीटी स्कोर वालों का इलाज किया जा रहा था। यहां ऑक्सीजन सिलेण्डर भी लगे हुए थे। टीम को वहां रेमडेसिविर के तीन खाली रैफर व एक इंजेक्शन मिला था। वहां मौजूद डॉक्टर व स्टाफ से बिल मांगे गए तो मौके पर बिल नहीं थे लेकिन जयपुर से खरीदना बताया था।

मरीजों के कागजों में रेमडेसिविर इंजेक्शन लगना लिखा हुआ था। टीम वहां तीन रैपर व एक इंजेक्शन लेकर आई है। वहां कोरोना गाइड लाइन की भी पालना नहीं पाई गई। मरीजों के परिजनों ने मास्क आदि नहीं लगाए थे। टीम में सीएमएचओ डॉ. गिरधारी लाल मेहरडा के साथ चिकित्साकर्मी संदीप जाखड़ व ईआईसी के विनोद बिश्नोई शामिल थे।

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