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घरेलू गैस से दौड़ रहीं कारें और ढाबों-होटलों में भी हो रहा दुरुपयोग

शहर में घरेलू रसोई गैस सिलेण्डरों का जमकर दुरुपयोग हो रहा है। गोल बाजार के प्रताप मार्केट एरिया में बुधवार को जिस दुकान पर सिलेण्डर भभका
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श्री गंगानगर

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pawan uppal

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Updated: 22 Dec 2017, 7:55 AM IST

gas cylinder

श्रीगंगानगर.

शहर में घरेलू रसोई गैस सिलेण्डरों का जमकर दुरुपयोग हो रहा है। गोल बाजार के प्रताप मार्केट एरिया में बुधवार को जिस दुकान पर सिलेण्डर भभका, वह घरेलू सिलेण्डर था। दुकानदार व्यवसायिक कार्य के लिए घरेलू गैस का प्रयोग कर रहा था।


हालात ये हैं कि अब भी सड़कों के किनारे चाय की रेहडिय़ों, ढाबा, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायिक स्थलों पर घरेलू गैस सिलेण्डरों का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है, जबकि इनके लिए व्यवसायिक सिलेण्डर कनेक्शन होना अनिवार्य है। और तो और गैस सिलेण्डर की रिफलिंग भी आम है। कारों में भी घरेलू गैस सिलेण्डरों का जमकर प्रयोग किया जा रहा है। इस मामले में जिला रसद विभाग कोई भी कार्रवाई नहीं कर रहा।


शहर में जिला अस्पताल के सामने, एच और एफ ब्लॉक में मिठाइयों की दुकानों तथा सुखाडिय़ा सर्किल व कोडा चौक और कलक्ट्रेट एरिया में चाय की दुकानों पर घरेलू गैस सिलेण्डर का दुरुपयोग देखा जा सकता है। शहरी क्षेत्र में 70 हजार से अधिक घरेलू गैस कनेक्शन हैं, जबकि सात गैस एजेन्सियों में मुश्किल से 450 व्यवसायिक कनेक्शन हैं। दुरुपयोग का मुख्य कारण घरेलू और व्यवसायिक गैस सिलेण्डर के दाम में भारी अंतर होना है। घरेलू गैस सिलेण्डर की कीमत 771 रुपये व व्यवसायिक की कीमत 1367 रुपये हैं। हालांंकि घरेलू गैस सिलेण्डर में 14 किलो गैस होती है, जबकि व्यवसायिक सिलेण्डर में इसकी मात्र 19 किलोग्राम है।


गैस किट है, पम्प नहीं
शहरी क्षेत्र में ऐसी भी कारों को सड़कों पर दौड़ते देखा जा सकता है, जो एलपीजी गैस से चल रही है। कार में गैस किट लगवाने के बाद जिला परिवहन विभाग से इन कारों को गैस से चलाने की अनुमति ली जाती है, लेकिन श्रीगंगानगर से 60 किलोमीटर की दूरी तक गैस भरवाने के लिए कोई पम्प नहीं है। आखिर इन कारों में गैस कहां से भरवाई जाती है? ये किसी से छिपा हुआ नहीं है।


दो साल से कार्रवाई ना के बराबर
लगभग दो साल पूर्व जिला रसद कार्यालय की ओर से शहरी क्षेत्र में छापे मार कर चाय की रेहडिय़ों, ढाबों, रेस्टोरेंट आदि से घरेलू गैस सिलेण्डर जब्त किए गए थे। ऐसे लोगों के खिलाफ रसद विभाग ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्रकरण बनाकर कलक्टर के समक्ष पेश किए। ज्यादातर मामलों में संबंधित व्यक्तियों के गैस सिलेण्डर को राजसात कर लिया गया। अब रसद विभाग इस मामले में चुप्पी साधे बैठा है।

गैस एजेन्सियों ने बनाया पूल
पिछले दो साल से रसद विभाग की ओर से घरेलू गैस सिलेण्डरों का व्यवसायिक इस्तेमाल रोकने के लिए कोई छापेमारी नहीं की गई है। कुछ बड़े होटलों में व्यवसायिक कनेक्शन तो हैं, लेकिन वे भी चोरी-छुपे घरेलू गैस सिलेण्डरों का प्रयोग कर रहे हैं। गैस एजेन्सियों ने इस मामले में पूल बना रखा है, लेकिन इसके बावजूद रोजाना 50 से 60 व्यवसायिक सिलेण्डरों की सप्लाई हो पाती है। शहर में लगभग 300 से अधिक चाय की दुकानें, ढाबें, रेस्टोरेंट आदि हैं। इनमें से ज्यादतर पर घरेलू सिलेण्डर ही प्रयोग में लाए जा रहे हैं। गली-मोहल्लों में गैस रिफलिंग की भी दुकानें खुली हुई हैं।

शिकायत पर होती है कार्रवाई गैस एजेन्सियां अब जिला रसद कार्यालय से लाइसेंस नहीं लेती। एजेन्सियां अब इस मामले में रसद विभाग के अधीन नहीं है। फिर भी शिकायत मिलने पर घरेलू गैस सिलेण्डरों का दुरुपयोग करने वालों पर छापे की कार्रवाई की जाती है।
- राकेश सोनी, प्रवर्तन अधिकारी, रसद विभाग, श्रीगंगानगर