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नई सड़कें रुकीं, पुरानी भी धंसीं: थमा नहीं शहर का विकास थमा

- श्रीगंगानगर में जिला प्रशासन, नगर परिषद और यूआईटी की चुप्पी, जनप्रतिनि​धि गायब, जनता परेशान, रोज हो रहे हादसे फिर भी एक्शन नहीं

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श्रीगंगानगर. शहर में विकास कार्य इन दिनों ठप पड़े हैं। नई सड़कों का निर्माण टेंडर प्रक्रिया अटकने के कारण शुरू नहीं हो पा रहा है, वहीं पुरानी सड़कों की हालत भी लगातार खराब होती जा रही है। शहर की अधिकांश सड़कों की सेहत बिगड़ चुकी है, इससे आमजन को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इलाके में जलापूर्ति सुधार के लिए बिछाई जा रही वाटरलाइन के कारण कई प्रमुख सड़कें जगह-जगह धंस गई हैं। मरम्मत कार्य समय पर न होने से गड्ढे और उखड़े हिस्से दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने एसआईआर से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता से पूरा करने का ढिंढोरा ऐसा पीटा कि करीब तीन माह से विकास योजनाओं को स्वीकृति मिलने में देरी हो रही है। जब तक टेंडर फाइनल नहीं होते, तब तक नई सड़कों का निर्माण और पुरानी सड़कों की मजबूती का काम अधर में लटका रहेगा। इस बीच, वाटर लाइन बिछाने के नाम पर इस वजह से न्यायिक अधिकारियों की सिविल लाइन्स एरिया में दीपावली पर बनी सड़कें धंस चुकी है। इन सड़कों पर कभी दुर्घटना होने का अंदेशा बना हुआ है। गारंटी पीरियड के बावजूद इन सड़कों की मरम्मत कराने के लिए नगर परिषद और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है।



हादसों का खतरा, ट्रैफिक पर असर



ट्रैफिक पुलिस के अनुसार खराब सड़कों के कारण फिसलन और वाहन क्षति की शिकायतें बढ़ी हैं। स्कूल बसों और एंबुलेंस को भी रूट बदलकर चलना पड़ रहा है। व्यस्त बाजार और अस्पताल मार्गों पर गड्ढों के कारण जाम की स्थिति बन रही है। आचार्य तुलसी मार्ग पर रामलीला मैदान के कार्नर से लेकर पूर्व सभापति करुणा चांडक के आवास तक सड़क नहीं बनी, इस वजह से वहां इतने बड़े गडढे हो गए है कि रोजाना दुपहिया वाहन खासतौर पर स्कूटी सवार लोग गिर रहे है। वहां निर्माणाधीन एक भूखंड धारक ने इन गडढों में मलबा डलवा दिया ताकि रात के समय कोई दुर्घटना नहीं हो। इन मलबे पर रोजाना सैंकड़ों वाहनों के गुजरने से मिटटी के रूप में तब्दील हो चुके है। यही हाल गोपीराम बगीची की दीवार से लेकर नई धानमंडी गेट तक सड़क गँडढों में तब्दील हो गई है, इस सड़क पर चलना किसी चुनौती से कम नहीं है। इस सड़क का निर्माण कार्य कराने के लिए तत्कालीन कलक्टर रूकमणि रियार ने प्रयास किए थे, यूआईटी ने खाका भी बनाया लेकिन कलक्टर के तबादले के बाद यह प्रस्ताव भी पानी में बह गए।



यूआईटी के पास यह सड़क भी जमींदोज



यूआईटी के पास मोटर मार्केट की मुख्य रोड चहल चौक से जस्सासिंह मार्ग चौराहे तक है, इस रोड पर चहल चौक से जस्सािंसह मार्ग की ओर से रोजाना प्राइवेट और रोडवेज बसों की आवााजाही रहती है। वहीं अन्य वाहन भी सुबह से लेकर देर रात तक आवाजाही करते है। लेकिन इस रोड के बींचोबीच पूरी रोड सीवर लाइन लीकेज से धंस चुकी है। इस लाइन को दुुरस्त कराए करीब चालीस दिन हो चुके है लेकिन उसे फिर से बनाने के लिए न्यास प्रशासन ने कदम तक नहीं उठाए है। अति व्यस्तम रहने वाली इस मार्ग पर बड़ा हादसा हुआ तब जिला प्रशासन एक्शन लेने आएगा। न्यास की प्रशासक के रूप में कलक्टर डा. मंजू है फिर भी इस रोड का जीर्णोद़्धार नहीं हो रहा है।



जनप्रतिनिधियों की नो एंट्री: कुर्सी पर अफसरों का कब्जा



नगर परिषद में पिछले 16 माह से सभापति की कुर्सी खाली है। निकाय चुनाव नहीं होने के कारण सभापति की कमान प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ में है। इससे ज्यादा बुरा हाल यूआईटी का है, यहां तो आठ सालों से अध्यक्ष का पद रिक्त पड़ा है। ऐसे यहां भी अफसरों की मनमर्जी का बोलबाला है। नगर परिषद और यूआईटी दोनेां संस्थाओं में जनप्रतिनिधियों की नो एंट्री होने के कारण शहरहित में काम अटक गए है। जहां अफसरों का मन होता है या उनकी कृपा होती है, उन एरिया में सड़कों की सेहत ठीक हो जाती है। शहर के अलग अलग एरिया में सीवर और वाटर लाइन बिछाने के बाद ठेका कंपनी की ओर से किए गए लीपोपाती कार्यो पर कुछ अर्से पहले विधायक जयदीप बिहाणी ने घुड़की दी थी लेकिन उनका भी ठेकेदारों पर तल्ख असर नहीं रहा। नतीजन पूर्व की तरह लीपापोती काम से बजट को जरूर साफ किया जा रहा है।



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