श्रीगंगानगर.अपने हौसले, जीवटता और मेहनत के दम पर पंजाबियों का भले ही दुनिया के हर देश में नाम है लेकिन पंजाबी भाषा, साहित्य, संस्कृति और कला को बढ़ावा देने के लिए बनी राजस्थान पंजाबी भाषा अकादमी अभी अपनी पहचान की मोहताज दिख रही है। लंबे समय से अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने के कारण अकादमी सिर्फ कागजों में चल रही है। हालात यह है कि श्रीगंगानगर में स्थापित यह अकादमी अपने भवन तक की मालिक नहीं है और जिला परिषद के एक छोटे से कमरे से ही संचालित हो रही है।
गौरतलब है कि कांग्रेस शासनकाल में 8 सितंबर 2023 को मनिंदर सिंह बग्गा को अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। लेकिन, कुछ ही दिन बाद विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लग गई और इसी साल18 दिसंबर को बग्गा को हटा दिया गया। उसके बाद से अब तक किसी को यह जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई। नतीजा न तो कोई ठोस योजना बनी और न ही पंजाबी भाषा-संस्कृति के संवर्धन के प्रयास हो रहे हैं।
20 समितियां भी सिर्फ नाम की
पंजाबी अकादमी ही नहीं, बल्कि कला-साहित्य और संस्कृति विभाग की करीब बीस समितियां भी अध्यक्षहीन पड़ी हैं। इनमें राजस्थान साहित्य अकादमी (उदयपुर), राजस्थान उर्दू अकादमी (जयपुर), ललित कला अकादमी (जयपुर), राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी (बीकानेर), राजस्थान संगीत नाटक अकादमी (जोधपुर), राजस्थान संस्कृत अकादमी (जयपुर), राजस्थान सिन्धी अकादमी (जयपुर), राजस्थान ब्रजभाषा अकादमी (जयपुर), पंडित जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी (जयपुर), भारतीय लोक कला मंडल (उदयपुर), मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी-फारसी शोध संस्थान (टोंक), राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान (जोधपुर), राज्य अभिलेखागार (बीकानेर), राजस्थान धरोहर प्राधिकरण (जयपुर), जवाहर कला केंद्र, रवींद्र मंच और जयपुर कथक केंद्र तक शामिल हैं। सभी जगह यही हाल है।
लोगों में सवाल, सरकार खामोश
पंजाबी समाज का कहना है कि जब सरकारें बड़ी-बड़ी घोषणाएं करती हैं तो इन अकादमियों के लिए भी गंभीरता दिखानी चाहिए। फिलहाल तो स्थिति यह है कि लाखों पंजाबी भाषाभाषियों की उम्मीदें अधर में हैं।
ये राज्य स्तर का मामला
अकादमी में अभी अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो पाई है,जबकि सामान्य गतिविधियां ही चल रही है। अध्यक्ष की नियुक्ति राज्य स्तर से जुड़ा मामला है।
डॉ.एनपी सिंह,कार्यवाहक सचिव,राजस्थान पंजाबी भाषा अकादमी,श्रीगंगानगर