
श्रीगंगानगर. केन्द्र सरकार की ओर से पोषण सेवाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया पोषण ट्रैकर एप अब आंगनबाड़ी वर्करों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। पूरे राजस्थान में 62 हजार केन्द्रों पर यह पोषाण ट्रेकर संचालित हो रहा है लेकिन तकनीकी जटिलताओं, कमजोर नेटवर्क और कम गुणवत्ता वाले मोबाइल फोन के कारण इस एप का संचालन सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है। इसके चलते वर्कर को रोजमर्रा के काम के साथ अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ रहा है। सरकार ने प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र को इस एप से जोड़ते हुए बच्चों की दैनिक उपस्थिति और पोषाहार वितरण की ऑनलाइन एंट्री अनिवार्य कर दी है। लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या और सीमित संसाधनों के कारण कार्यकर्ता समय पर डेटा अपलोड नहीं कर पा रहे हैं। आंगनबाड़ी वर्करों का कहना है कि उन्हें जो मोबाइल फोन उपलब्ध कराए गए हैं, वे तकनीकी रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि एप को सुचारू रूप से चला सकें। कई बार एप खुलने में ही काफी समय लग जाता है, तो कभी फोटो और दस्तावेज अपलोड करते समय प्रक्रिया बीच में ही अटक जाती है।
फोटो अपलोड बनी समस्या
ज्यादातर वर्करों के पास मौजूदा एंड्रोड फोन है वे काफी आउटडेटेड के है। ऐसे में आदेश की पालना कराने में पोषण ट्रेकर में प्रत्येक लाभार्थी को पोषाहार वितरण के बारे में जानकारी के साथ साथ संबंधित लाभार्थी की फोटो अपलोड करना है। वहीं वर्करों का कहना है कि कोई महिला गर्भवती है लेकिन उसकी डिलीवरी उसके पीहर में कराने के लिए उसके परिजन भेज चुके है तो उसके एक माह या दो माह का पोषाहार देने के साथ साथ उसकी फोटो अपलोड कैसे और किस आधार पर की जाएं, यह संशय अब तक महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से स्पष्ट नहीं किया गया है। इसके अलावा केन्द्र के आसपास रहने वाले लोगों की अपार आईडी बनाने के लिए वर्करों को इस एप में अपलोड कराने में अड़चन बनी हुई है।
एक कम्प्यूटर ऑपरेटर जितना वर्क लोड
वर्करों के अनुसार इस एप में तमाम औपचारिकताएं अपलोड कराने में एक कम्प्यूटर ऑपरेटर जितना काम करना पड़ता है। ऐसे में यह बोझ वर्करों को अपने स्तर पर निपटाने के लिए अधिकृत किया गया है। लेकिन सुविधाएं नहीं है। कई गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहद कमजोर है। ऐसे में बच्चों की उपस्थिति दर्ज करना और पोषाहार वितरण की जानकारी तुरंत अपलोड करना संभव नहीं हो पाता। कई बार उन्हें निजी खर्च पर बेहतर नेटवर्क की तलाश में दूसरे स्थानों पर जाना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है। इस समस्या के कारण आंगनबाड़ी केन्द्रों पर मूल सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कुलविन्द्र कौर का कहना है कि हम दिनभर बच्चों और महिलाओं के लिए काम करते हैं, लेकिन अब आधा समय मोबाइल और एप को चलाने में ही निकल जाता है। नेटवर्क नहीं होने से कई बार डेटा अपलोड नहीं हो पाता, जिससे ऊपर से डांट भी पड़ती है।
विभाग ने स्वीकारा कि आउटडेटेड हैंड सैट
महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक ऋषभ जैन का मानना है कि पोषण ट्रैकर एप सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं की निगरानी आसान होती है। वर्करों के पास सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए हैंडसैट फोन आउटेडेटेड हो चुके है, इस वजह से इस एप में दस्तावेज या फोटो अपलोड में समस्या आ रही है। सरकार ने इस समस्या को गंभीर मानते हुए जल्द ही नए हैंड सेट देने की सिफारिश की है।
यह पूरे देश में समस्या, समाधान करें सरकार
राजस्थान आंगनबाड़ी कर्मचारी महासंघ की प्रदेश महामंत्री पूजा चौधरी का कहना है कि पोषण ट्रैकर एप से पोषाहार वितरण में गड़बड़ी की शिकायतें अब दूर हो जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत में यह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए जी का जंजाल बन गया है। वर्कर को साढ़े चार हजार रुपए केन्द्र सरकार से मिलते है तो इतनी ही राशि राज्य सरकार दे रही है। केन्द्र सरकार की ओर से दिए जाने वाले मानदेय का भुगतान समय समय पर नहीं आ रहा। वहीं एप के माध्यम से आंगनबाड़ी केन्द्र के एरिया में रहने वाली सात सौ से लेकर एक हजार की आबादी के लोगों की आइडी बनाने, गर्भवती महिला के पीहर जाने से पोषाहार का वितरण अटकने, हाई क्वालिटी के मोबाइल फोन नहीं होने से फोटो पिक्चर अपलोड में अड़चन आदि समस्या है। नेट के लिए सिर्फ 166 रुपए दिए जा रहे है, वे नाकाफी है। अब तक उड़ीसा और गुजरात सरकार ने सकरात्मक कदम उठाने की बात कही है लेकिन अपने राजस्थान में डबल इंजन की सरकार के बावजूद िस्थति त्यों की त्यों बनी हुई है। उम्मीद है कि सरकार इस संबंध में कदम उठाएगी।
Published on:
03 Apr 2026 12:25 pm
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