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.कोरोना से लड़ाई में हमनें खोए हमारे हीरो,परिवार और समाज को आज भी है नाज

राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस पर विशेष

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.कोरोना से लड़ाई में हमनें खोए हमारे हीरो,परिवार और समाज को आज भी है नाज

.कोरोना से लड़ाई में हमनें खोए हमारे हीरो,परिवार और समाज को आज भी है नाज

-राष्ट्रीय डॉक्टर दिवस पर विशेष...कोरोना से लड़ाई में हमनें खोए हमारे हीरो,परिवार और समाज को आज भी है नाज

-श्रीगंगानगर.कोरोना महामारी के चलते मेरे पिता डॉ.अशोक नागपाल को 16 मई 2021 के दिन ईश्वर ने अपने चरणों में ले लिया था। वे हमारे परिवार के हीरो थे। उन्होंने एसपीएमसी कॉलेज बीकानेर से 1979 में एमबीबीएस और 1982 में एनेस्थिसियोलॉजी में एमडी की उपाधि प्राप्त की। वे गंगानगर क्षेत्र के अग्रणी संज्ञाहरण विशेषज्ञों में से एक थे। उन्होंने 16 वर्ष तक जिले के सरकारी अस्पताल और उसके बाद 21 सालों तक निजी और सेना अस्पतालों में अपनी सेवाएं दी। असल में वे नागरिक और सेना के डॉक्टरों के बीच सेतु थे। बहुत ही सरल और सहायक व्यक्तित्व के साथ उन्होंने अपने अनुभवों से कई युवा डॉक्टरों को सिखाया भी। इस गतिशील व्यक्तित्व के कारण आज भी हर किसी के दिल में उनका एक अनूठा स्थान है। खुद के नाम 'अशोक' को सार्थक करते हुए वे हमेशा एक सुखी आत्मा रहे। और उन्होंने बहुत से लोगों की जान बचाकर और कई तरह से दूसरों की देखभाल और मदद करके लोगों के जीवन को छुआ था। मुझे गर्व है कि मेरे पिता ने अपने कर्तव्य पर एक सच्चे सैनिक के रूप में लोगों की सेवा करते-2 इस दुनिया से विदाई ली। पत्नी सुषमा नागपाल व बेटी अनीशा नागपाल व बेटा सौरभ नागपाल का बहुत ध्यान रखते थे।
बेटी:डॉ मनीषा कटारिया (नेत्र विशेषज्ञ)

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मेरे मित्र डॉ.गुरमीत सिंह ने इसी 12 जून को अपनी सांसारिक यात्रा को पूरा किया। पिता बघेल सिंह के ब्रिटिश आर्मी में हवलदार रहने के कारण गुरमीतसिंह ने शुरू से ही घर में सेवा और देशभक्ति का जज्बा देखा। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई रत्तेवाला के सरकारी स्कूल व 1964 में एमबीबीएस पिलानी से हुई। बीकानेर मेडिकल कॉलेज से एमडी की पढ़ाई में वे गोल्डमेडलिस्ट रहे। शुरुआती दौर में 2 वर्ष तक उन्होंने एसएमएस कॉलेज जयपुर में ट्यूटर की नौकरी की। उस जमाने में इतनी बड़ी पढ़ाई करने के बाद किसी बड़े शहर में नौकरी करने के बजाए गुरमीत सिंह ने रायसिंह नगर की जनता की सेवा करना उचित समझा। शुरुआती दिनों में इन्होंने चौधरी ईश्रदास धर्मशाला में कोने की छोटी सी दुकान में मात्र डेढ़ रुपए की फीस लेकर लोगों का इलाज करना शुरू किया। अपनी योग्यता अनुभव लगन और साफ छवि के चलते लोगों के दिलों में इनका विशेष स्थान बनता चला गया। एक पर्यावरण प्रेमी के रूप में उन्होंने बड़ी संख्या में पेड़ पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में अपना अहम योगदान दिया। 2001 में निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए पंचायत समिति प्रधान और 2011 में वे नगर पालिका के अध्यक्ष बने। युवाओं को उच्च शिक्षा देने के लिए उन्होंने रायसिंहनगर में शहीद भगत सिंह कॉलेज और उसके बाद गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पंजाब हरियाणा के भी उनके पास इलाज के लिए आते थे। मुझे बताते हुए फक्र महसूस होता है कि मेरे दोस्त ने कोरोना की पहली और दूसरी लहर में भी नाम मात्र की फीस लेकर लोगों का बहादुरी के साथ इलाज कर हजारों प्राणों की रक्षा की। वर्ष 2008 में मुझे पहली बार बुलाकर पेड़-पौधे लगाए। बहुत से गरीब लोगों का नि:शुल्क इलाज किया। 65 एनपी स्कूल में पौधरोपण किया और वहां पर कार्यक्रम भी करवाया।

-संतलाल सैन,प्रधानाचार्य,गांव बगीचा,रायसिंहनगर

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