
मंगेश कौशिक
अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार अफीम से बनने वाली हेरोइन को पंजाब के ड्रग माफिया तक पहुंचाने के लिए पाकिस्तानी तस्करों ने श्रीगंगानगर जिले से सटी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर डिलीवरी प्वाइंट तय किए हैं, वहीं पंजाब के ड्रग माफिया ने इन डिलीवरी प्वाइंट के आसपास ऐसे प्यादे ढूंढ़ लिए हैं जो सीमा पार से आई हेरोइन को पंजाब तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इसकी एवज में उन्हें ड्रग माफिया से अच्छा खासा पैसा मिलता है। अनूपगढ़ के सीमावर्ती गांव 33 एपीडी 19 अप्रेल को सीआईडी की ओर से पाकिस्तान से आई साढ़े तीन किलो हेरोइन बरामदगी से इसकी पुष्टि हुई। इस मामले में दो सगे भाइयों समेत चार लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
पंजाब के ड्रग माफिया और पाकिस्तानी तस्करों के बीच संबंध दशकों पुराने हैं। दो देशों के तस्करों के बीच संबंधों ने पंजाब को नशे के गर्त में धकेल दिया है। सीमा सुरक्षा बल की सख्ती के चलते पंजाब के सीमावर्ती जिलों फाजिल्का, फिरोजपुर, तरनतारन, अमृतसर और गुरुदासपुर में सक्रिय ड्रग माफिया ने पिछले कई सालों से राजस्थान से सटी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा को हेरोइन तस्करी का नया माध्यम बनाया है।
श्रीगंगानगर के अलावा बीकानेर और जैसलमेर जिलों में सीमा पार से आई हेरोइन की बड़ी खेप की बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी यह स्वीकार रही है कि पंजाब के ड्रग माफिया और पाकिस्तानी तस्करों ने न केवल राजस्थान से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर डिलीवरी प्वाइंट बना लिए बल्कि ऐसे लोगों को भी ढूंढ़ लिया है जो सीमा क्षेत्र में रहते हैं और सीमा पार से आने वाली हेरोइन की खेप की डिलीवरी लेने के साथ उसे पंजाब तक पहुंचाने का काम भी कर सकते हैं।
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि पंजाब में खालिस्तान समर्थक ताकतें पुन: सक्रिय हो रही हैं। इनकी मदद के लिए पाकिस्तान से हथियार भी आने लगे हैं। पंजाब में ड्रोन से हथियारों की खेप गिराने के कई मामले सामने आने के बाद वहां बीएसएफ को बॉर्डर से पचास किलोमीटर तक के दायरे में कार्रवाई का अधिकार देने के साथ ड्रोन को मार गिराने के लिए अत्याधुनिक हथियार भी मुहैया करवाए गए हैं।
ऐसी स्थिति में राजस्थान से सटी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से हेरोइन के साथ हथियारों की खेप भी भेजने का प्रयास खालिस्तान समर्थकों को शह देने वाली पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई कर सकती है। ऐसी स्थिति में बीएसएफ को बॉर्डर पर अलर्ट मोड पर रहना ही होगा। अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी बॉर्डर एरिया में अपना नेटवर्क और मजबूत करना होगा।
आईएसआई की मदद
22 अक्टूबर 2011 को बीएसएफ ने मदेरां के पास पंजाब के कुख्यात भोलू गैंग के तस्कर निशान सिंह उर्फ सोनू को पकड़ा था, इनका एक साथी फरार हो गया था। सोनू ने खुलासा किया था कि वह पाकिस्तानी तस्करों से हेरोइन की डिलीवरी लेने आया था।
23 जनवरी 2012 को बीएसएफ ने खखां सीमा चौकी क्षेत्र में एक खेत में सीमा पार से फेंकी गई हेरोइन की खेप बरामद की। डिलीवरी लेने आया पंजाब का तस्कर वहां से फरार हो गया।
23 फरवरी 2012 हिन्दुमलकोट में बीएसएफ ने खेत में सीमा पार से फेंकी गई छह किलोग्राम हेरोइन बरामद की। डिलीवरी लेने आए तस्कर पंजाब नंबर की दो बाइक छोड़कर भाग गए।
3 अक्टूबर 2013 को बीएसएफ व एटीएस ने संयुक्त कार्रवाई में हिन्दुमलकोट इलाके में आतंकी संगठन के कमांडर रहे बोहड़सिंह व उसके दो साथियों को पकड़ा। पूछताछ में इन्होंने हेरोइन की तस्करी के सिलसिले में आना स्वीकार किया।
2 मार्च 2017 को गजसिंहपुर क्षेत्र में सीमा से सटे गांव पांच एफडी के पास हेरोइन के दो पैकेट मिले। बीएसएफ व पुलिस ने सर्च अभियान चलाया। लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस ने इसे ड्रग माफिया की रैकी माना।
8 सितंबर 2020 को रायसिंहनगर इलाके में भारत-पाक सीमा पर ख्यालीवाला सीमा चौकी क्षेत्र में रात को बीएसएफ से हुई मुठभेड़ में दो पाकिस्तानी तस्कर मारे गए थे। इनके पास से आठ किलोग्राम हेरोइन, दो पिस्तौल, 28 कारतूस, नाइट विजन डिवाइस, करेंसी, रियाल मुद्रा, चाकू आदि बरामद किए गए ।
8 फरवरी 2021 को तारबंदी के पास हिन्दुमलकोट इलाके में मदनलाल चौकी के समीप पाक तस्करों और बीएसएफ के बीच फायरिंग हुई , अंधेरे का फायदा उठा कर तस्कर फरार हो गए। तारबंदी के पास 999 ग्राम हेरोइन मिली।
2 अक्टूबर 2021 को तीन संदिग्ध सीमा इलाके में पंजाब से यहां हेरोइन लेने आए थे, जिनको बीएसएफ की जी ब्रांच ने पकड़ा।
19 अप्रेल 2022 को सीआईडी की सक्रियता से ड्रोन के जरिए पाकिस्तान से हेरोइन की खेप आने का मामला पकड़ में आया। इस मामले में साढ़े तीन किलो हेरोइन की बरामदगी के साथ बाूर्डर के गांव 33 एपीडी के दो सगे भाइयों के साथ चार लोगों की गिरफ्तारी हुई। साढ़े तीन किलो हेरोइन इन्होंने घर में बनी धमाका कुई में डाल दी थी।
खुफिया एजेंसियों का कहना है कि हेरोइन की खेप भारत में पहुंचाने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी वहां के तस्करों की मददगार है। यही वजह है कि हेरोइन की खेप के साथ पाकिस्तानी तस्कर बेखौफ अंतरराष्ट्रीय सीमा तक आते हैं और तारबंदी के ऊपर से हेरोइन के पैकेट भारतीय सीमा में फेंक कर वापिस चले जाते हैं। हेरोइन के पैकेट पहले से तय डिलीवरी प्वाइंट पर डाले जाते हैं ताकि पंजाब के ड्रग माफिया के प्यादे उसे बीएसएफ की नजर पड़ने से पहले ही उठा ले।
अनूपगढ़ क्षेत्र में अप्रेल में पकड़ी गई हेरोइन के बाद यह खुलासा हुआ कि पाकिस्तानी तस्कर हेरोइन की डिलीवरी देने में ड्रोन का इस्तेमाल करने लगे हैं। एक बार में पाकिस्तानी तस्कर सात किलो हेरोइन की खेप भेजते हैं। इसके लिए ड्रोन को साढ़े तीन किलो हेरोइन के साथ दो चक्कर लगाने पड़ते हैं। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि पाकिस्तानी तस्कर हेरोइन की खेप भेजने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो यह काम आईएसआई और पाकिस्तानी सेना की मदद के बिना हो ही नहीं सकता।
Updated on:
02 Jun 2022 11:13 am
Published on:
02 Jun 2022 11:06 am
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