Video : चुनिंदा डॉक्टरों के भरोसे रोगी, राजकीय जिला चिकित्सालय में बढऩे लगी ओपीडी

शहर के राजकीय जिला चिकित्सालय के गलियारे हालांकि गुरुवार को भी सूने रहे।

By: vikas meel

Published: 09 Nov 2017, 09:08 PM IST

श्रीगंगानगर.

शहर के राजकीय जिला चिकित्सालय के गलियारे हालांकि गुरुवार को भी सूने रहे। रोगी चुनिंदा डॉक्टरों के भरोसे रहे, इनमें भी अधिकांश आयुष और संविदा पर कार्यरत डॉक्टर रहे। पहले के दिनों की अपेक्षा ओपीडी बढ़ी। नए रोगी भी भर्ती हुए लेकिन वार्डों में अधिकांश नर्सिंग स्टाफ चिकित्सकों की कमी से परेशान नजर आया। उनका कहना था कि वे रोगियों का उपचार तो कर सकते हैं लेकिन अंतिम तौर पर तो सलाह के लिए चिकित्सक ही चाहिए, ऐसे में उपचार तो प्रभावित हो ही रहा है। सबसे ज्यादा असर गहन चिकित्सा इकाई पर नजर आया, जहां गुरुवार को केवल एक रोगी भर्ती मिला जबकि चिकित्सकों के आंदोलन के पहले दिन तक यहां पांच रोगी भर्ती थे। तीन चिकित्सकों के भरोसे रहने वाली ओपीडी वर्तमान में केवल एक चिकित्सक के भरोसे है। वे भी बीकानेर से बुलाए गए एसोसिएट प्रोफेसर हैं।


कुर्सी संभाली नहीं, मगर देखी व्यवस्था

पीएमओ डॉ. सुनीता सरदाना गुरुवार को चिकित्सालय पहुंची, हालांकि उन्होंने पीएमओ की कुर्सी तो नहीं संभाली लेकिन राजस्थान मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी के कार्यालय में बैठकर व्यवस्थाओं पर नजर रखीं। मुख्य रूप से व्यवस्थाओं की बागडोर संविदा पर कार्यरत डॉ. आईपीएस पूनिया के हाथ थी, वहीं पीएमओ व्यवस्थाएं देख रही थी। इस बारे में प्रतिक्रिया चाहने पर पीएमओ डॉ. सरदाना का कहना था कि रोगियों के हित में ऑफिस आई हैं लेकिन कुर्सी नहीं संभालेंगी, क्योंकि उन्होंने त्यागपत्र दे रखा है। वे केवल व्यवस्थाओं पर नजर रखने के लिए डॉ. पूनिया के सहयोग से कार्य कर रही हैं।


सीएमएचओ भी पहुंचे ऑफिस

अब तक लगातार कार्यालय से अनुपस्थित रह रहे मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेश बंसल भी पिछले दो दिन से कार्यालय पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि हालांकि वे उपस्थित दर्ज नहीं कर रहे, लेकिन आवश्यक कामकाज निपटा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विशेष डाक आदि से संबंधित मामलों पर वे नजर बनाए हुए हैं तथा व्यवस्थाएं बनाए रखने के लिए उन्होंने कामकाज संभाला है।


इन ओपीडी में मिले डॉक्टर

इस बीच सर्जरी, मेडिसिन, ईएनटी, दंतरोग की ओपीडी, मेडिकल ज्यूरिस्ट कक्ष में चिकित्सक नजर आए। इसके साथ ही इमरजेंसी में तीन चिकित्सकों की व्यवस्था थी वहीं आईसीयू के लिए भी एक चिकित्सक की व्यवस्था थी। वार्डों में व्यवस्था संभालने वाले नर्सिंग कर्मियों का कहना था कि हड़ताल का असर तो दिख ही रहा है। वार्डों में जहां दो से तीन डॉक्टरों की जरूरत है वहीं केवल एक चिकित्सक मिल रहा है, ऐसे में रोगी तो परेशान हो ही रहे हैं।

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