
‘दिलबर की मेरे क्या बात है, सारा जहां उसकी ही बिसात है’
-जनकराज पारीक साहित्य मंच का आयोजन, काव्य रचनाओं में दिखा उत्साह का रंग
श्रीकरणपुर. जनकराज पारीक साहित्य मंच के तत्वावधान में सोमवार शाम व्यापार मंडल में काव्य गोष्ठी हुई। करीब ढाई घंटे तक चले कार्यक्रम में रचनाकारों ने अध्यात्म, उत्साह व प्रेरणा से सजी रचनाएं पेश की।
मुख्य अतिथि सुरेश कनवाडिय़ा ‘साधु’ ने कहा कि काव्य साहित्य की वह विधा है जिसमें मनोभाव को कलात्मक रूप से अभिव्यक्त किया जाता है। उन्होंने ‘दिलबर की मेरे क्या बात है, सारा जहां उसकी ही बिसात है’ और ‘मस्त फकीरी, आलम गीरी, फाका मस्ती, क्या कहिए’ रचनाएं सुनाकर तालियां बटोरी। कार्यक्रम अध्यक्ष व्यापार मंडल सचिव दीपक अग्रवाल ने कहा कि साहित्य हमारे समाज को एक नई चेतना प्रदान करता है। विशिष्ट अतिथि बलदेव सैन ने मंच के प्रयासों की सराहना की।
दर्द अथाह है समंदर में नहीं उतना पानी
गोष्ठी का आगाज सरस्वती वंदना से किया गया। मंच के सचिव कन्हैया जगवानी ने ‘कुछ ऐसे संकल्प लें हर दिन दिवाली हो जाए’ काव्य रचना सुनाकर माहौल भावपूर्ण बना दिया।
कला मंच के सचिव वासुदेव गर्ग ने ‘यह महफिल नहीं एक सलीका है’, कवि कलविंद्र सिंह कामिल ने ‘दुनिया बदलती है’, प्रदीप लावा ने ‘तू रख हौंसला’, निकिता ने ‘नहीं होना चाहिए लडक़ा लडक़ी में भेदभाव’, मोनिका बंसल ने ‘अस्पताल में भ्रष्टाचार’, तेजसिंह जादौन ने ‘क्या करेंगी आंधियां’ और महेन्द्र सिंह ने ‘दिल में दर्द अथाह है समंदर में नहीं उतना पानी’ रचना सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। शिक्षक कृष्ण शर्मा ‘खबरी’ ने ‘बरसों पुराना ये याराना क्यों टूटा ’ गीत सुनाकर वाहवाही लूटी। पवन गौड़ व मुकेश राजपुरोहित ने हास्य रचनाएं पेश की। गोष्ठी के अंत में संगठन अध्यक्ष ललित बंसल निगाह ने ‘मुस्कान से बड़ी यारो कोई मरहम नहीं होती’ रचना सुनाकर अतिथियों का आभार जताया।
Published on:
29 Oct 2019 07:57 pm
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