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Video : किन्नू उत्पादन पर मंडराया खतरा

पूरे विश्व में हमारे इस किन्नू की विशेष पहचान है लेकिन मौसम में आए बदलाव के कारण किन्नू के पौधे दम तोडऩे लगे है।

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श्रीगंगानगर।

इलाके में किन्नू का उत्पादन इस बार कम होने की आंशका बनी हुई है। पूरे विश्व में हमारे इस किन्नू की विशेष पहचान है लेकिन मौसम में आए बदलाव के कारण किन्नू के पौधे दम तोडऩे लगे है। ऐसे में किन्नू के उत्पादन को लेकर किसानों के चेहरे अभी से मुरझाने लगे है। हालांकि किन्नू उत्पादन का सीजन अभी अगले महीने के अंतिम सप्ताह में शुरू होगा लेकिन जिस तरीके से किन्नू के बाग सूख रहे है, उसने अभी से इस फल के भारी उत्पादन का गणित बिगाड़ दिया है। धूप और तेज गर्मी में समय पर सिंचाई पानी नहीं मिलने पर बाग सूख चुके है, इस वजह से इलाके के प्रमुख फल किन्नू पर कहर जारी है। इस बार उत्पादन गत सीजन की तुलना में आधे से भी कम माना जा रहा है। दूसरी तरफ, कुछ बागों में फल का झडऩा परेशानी का सबब बना हुआ है।


तापमान ने बिगाड़ा गणित
उत्पादकों और कृषि वैज्ञानिकों की माने तो इलाके में तापमान ने किन्नू उत्पादन का गणित बिगाड़ दिया है। पड़ौसी पंजाब के अबोहर क्षेत्र में भी यही हाल है। अक्टूबर महीने में तापमान चालीस डिग्री सेल्सियस रहने से बाग सूखने लगे है। नहरबंदी के कारण सिंचाई पानी इन बागों तक नहीं पहुंचा। इस कारण पौधे सूख गए है। कई बागों में रोग ऐसा फैला है कि किन्नू के पौधे विकसित ही नहीं हो पाए है। इलाके और पंजाब के अबोहर क्षेत्र के किन्नू को यहां बाजार में बेचा जाता है। यहां से पैकिंग होकर यह किन्नू देश के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा श्रीलंका तक भी निर्यात किया जाता है।


80 हजार बीघा में किन्नू की फसल


जिले में 60 हजार बीघा से अधिक क्षेत्रफल में किन्नू के ऐसे बाग हैं जो फल देने की अवस्था में है, वैसे इसका कुल क्षेत्रफल 80 हजार बीघा से अधिक हो चुका है। उद्यान विभाग सहायक निदेशक बीएस सिद्धू ने बताया कि इस बार किन्नू का उत्पादन अपेक्षाकृत काफी कम है। तापमान में आया उतार-चढ़ाव इस पर भारी पड़ा साथ ही नहरबंदी के चलते जरूरत के समय मांग के मुताबिक पानी नहीं मिल पाया। सिद्धू के अनुसार कुछ बागों में फल झडऩे की समस्या सामने आई है।


तो खत्म हो जाएगी खेती

तापमान में बदलाव तथा फल का वजन बढऩे के कारण झडऩे की समस्या आ रही है। फली छेदक कीड़ों का प्रकोप भी सामने आया है। इससे भी फल झड़ जाता है। यह पीला होकर गल सा जाता है। दबाने पर पंक्चर होता है। यदि किसान अभी नहीं संभले तो किन्नू की खेती खत्म हो जाएगी। ऐसे में इन दिनों सावचेत होकर पौधे बचाने की जरुरत है।

- डा.चन्द्रभान, उद्यान वैज्ञानिक

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