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बेटे की खातिर रिटायर्ड जज की पत्नी ने अपनाई बदहाली

बेटे की खातिर रिटायर्ड जज की पत्नी ने अपनाई बदहाली

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Retired Judges

श्रीगंगानगर.

एक रिटायर्ड जज की पत्नी ने अपने मंद्धबुद्धि जवान बेटे के लिए बिस्किट व ब्रेड खाकर बदहाली में जीवन जीना मंजूर कर लिया, लेकिन अपने अन्य बेटों के पास नहीं गई। एमए एलएलबी वृद्धा अपने इस बेटे के साथ सद्भावना नगर में ऐसे हालात में रह रही थी कि वहां यदि कोई व्यक्ति मकान में चला जाए तो चक्कर खाकर वहीं गिर जाए। ऐसा लग रहा था कि इस मकान में सालों से कोई आया ही नहीं है। मारपीट के एक मामले में पुलिस मकान के अंदर गई तो पूरा मामला सामने आया। पुलिस ने अंदर जाकर देखा तो प्रत्येक कमरे में सामान बिखरा पड़ा था और दुर्गंध के कारण वहां रुकना मुश्किल हो रहा था। यह जानकारी मिलने पर तपोवन ट्रस्ट के पदाधिकारी व अन्य लोग इस मकान में पहुंचे और महिला को ट्रस्ट की ओर से संचालित अस्पताल में पहुंचाया।


चाइल्ड लाइन के जिला समन्वयक त्रिलोक वर्मा ने बताया कि सद्भावना नगर में दो दिन पहले यहां पानी की टंकी के पास एक युवक ने कर्मचारियों से मारपीट कर दी। सूचना पर सेतिया चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। झगड़ा करने वाला अपने मकान में घुस गया। पुलिसकर्मी घर के अंदर गए तो घर के हालात और वृद्धा की स्थिति देखकर दंग रह गए, तब पुलिसकमियों को युवक को देखकर पता चला कि वह मंद्धबुद्धि है। पुलिसकर्मियों ने इस मामले की जानकारी तपोवन ट्रस्ट अध्यक्ष महेश पेड़ीवाल को दी।
शुक्रवार को ट्रस्ट अध्यक्ष पेड़ीवाल व अन्य लोग सेतिया चौकी प्रभारी राजकुमार तथा पुलिसकर्मियों के साथ इस मकान पर पहुंचे।

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बाहर से देखने मकान की स्थिति ऐसी थी कि कोई सालों से यहां आया ही ना हो। पुलिसकर्मी दरवाजा खोलकर मकान में अंदर घुसे तो सभी सामान अस्त व्यस्त था। आवाज लगाने पर एक युवक आया और कमरे का दरवाजा खोलकर अंदर ले गया, जहां कमरे का सभी सामान इधर-उधर बिखरा पड़ा था। कई माह से वहां झाडू नहीं लगी थी। गंदगी के कारण दुर्गंध आ रही थी। वहीं एक कमरे में 70 वर्षीया एक वृद्धा थी, जिसके बाल सूख चुके थे और शायद उसने कई माह से कपड़े भी नहीं बदले थे। सभी कमरों में सामान कबाड़ खाने की तरह भरा और बिखरा पड़ा था।

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ट्रस्ट अध्यक्ष महेश पेड़ीवाल व पुलिसकर्मियों ने जब वृद्धा से पूछा तो पता चला कि वृद्धा के पिता श्रीगंगानगर के जाने-माने शिक्षाविद् थे और उनके पति जिला जज के पद से रिटायर्ड हुए, जिनकी करीब दस साल पहले दिल का दौरा पडऩे से मृत्यु हो गई थी। वृद्धा के तीन पुत्र हैं, जिनमें एक दिल्ली व दूसरा जयपुर में अच्छे पद पर है तथा एक उनके साथ रह रहा है जो मंदबुद्धि है। मंदबुद्धि पुत्र के कारण वे कहीं नहीं जाती हैं। वृद्धा के भाई भी जज के पद से रिटायर्ड हैं। वृद्धा को ट्रस्ट अध्यक्ष व अन्य लोग पुलिस की सहायता से काफी मुश्किल के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां वृद्धा के इलाज व देखभाल तथा मकान को व्यवस्थित करने का जिम्मा ट्रस्ट अध्यक्ष ने लिया।

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