17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बढ़ता तापमान: गेहूं,सरसों और चना फसलों पर विपरित प्रभाव

-जिले में आइजीएनपी, भाखड़ा और गंगनहर परियोजना क्षेत्र में वर्ष 2024-25 में 2 लाख 18 हजार 556 हेक्टेयर में गेहूं की फसल

2 min read
Google source verification
  • श्रीगंगानगर.इन दिनों तापमान में अचानक वृद्धि हुई है, जिससे किसानों में फसलों को होने वाले नुकसान की चिंता बढ़ गई है। गेहूं, सरसों और चने की फसलों के लिए यह अनुकूल नहीं है। गेहूं की फसल के लिए अनुकूल तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए, लेकिन दिन का तापमान 30 से 32 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। कृषि विभाग ने फसलों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए किसानों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग का कहना है कि बढ़ते तापमान से फसलों को बचाने के लिए किसान इन उपायों को अपनाकर संभावित नुकसान कम कर सकते हैं। जिले में आइजीएनपी, भाखड़ा और गंगनहर परियोजना क्षेत्र में वर्ष 2024-25 में 2 लाख 18 हजार 556 हेक्टेयर में गेहूं की फसल है। गेहूं की फसल वर्तमान में बीज भराव और बीज निर्माण की अवस्था में है। इस समय तापमान में वृद्धि फसल के लिए हानिकारक हो सकती है।

सरसों की फसल के लिए उपाय


  • सरसों की फसल को पकाव के समय सूखे के प्रभाव से बचाने के लिए पोटेशियम नाइट्रेट 1 किग्रा. का 100 लीटर पानी में घोल बनाकर फसल की फूल वाली अवस्था एवं फली वाली अवस्था पर छिडक़ाव करें।

चने की फसल के लिए उपाय

  • चने की फसल को पकाव के समय सूखे के प्रभाव से बचाने के लिए पोटेशियम नाइट्रेट (13.0.45) 1 किलोग्राम का 100 लीटर पानी में घोल बनाकर फसल की फूल वाली अवस्था और फली वाली अवस्था पर पर्णीय छिडक़ाव करें।

कृषि विभाग ने किसानों को निम्नलिखित उपाय करने की सलाह दी है

सिंचाई: सिंचाई पानी की उपलब्धता के अनुसार उपयोग करें।

सिलिसिक अम्ल का छिडक़ाव: गेहूं की फसल में तापमान वृद्धि के प्रभाव से बचने के लिए बीज भराव और बीज निर्माण की अवस्था में सिलिसिक अम्ल (15 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी) या (10) ग्राम प्रति 100 लीटर पानी या 25 ग्राम 100 लीटर पानी का पर्णीय छिडक़ाव करें। पहला छिडक़ाव झंडा पत्ती अवस्था और दूसरा छिडक़ाव दूधिया अवस्था पर करें। सिलिसिक अम्ल गेहूं को प्रतिकूल परिस्थितियों से लडऩे की शक्ति प्रदान करता है और समय से पहले पकने से रोकता है।

एस्कार्बिक अम्ल का छिडक़ाव: गेहूं की बाली आते समय एस्कार्बिक अम्ल के 10 ग्राम प्रति 100 लीटर पानी के घोल का छिडक़ाव करने से फसल पकते समय सामान्य से अधिक तापमान होने पर भी उपज में नुकसान नहीं होगा।

पोटेशियम नाइट्रेट का छिडक़ाव: गेहूं की फसल में बूटलीफ एवं एंथेसिस अवस्था पर पोटेशियम नाइट्रेट (13.0.45) के दो प्रतिशत घोल का छिडक़ाव करें।

पछेती बोई फसल: गेहूं की पछेती बोई फसल में पोटेशियम नाइट्रेट 13.0.45, चिलेटेड जिंक और चिलेटेड मैंगनीज का स्प्रे भी लाभप्रद है।

एक्सपर्ट व्यू

  • गेहूं में सिलिसिक अम्ल का छिडक़ाव करने से तापमान में होने वाली वृद्धि से नुकसान की आशंका कम हो जाएगी और उत्पादन में वृद्धि होगी।
  • -जगजीत सिंह, कृषि अनुसंधान अधिकारी ,श्रीगंगानगर।
  • किसानों को सलाह दी है कि वे सिफारिश के अनुसार तत्वों का छिडक़ाव करें, जिससे फसल की इस अवस्था पर नुकसान नहीं होगा।
  • -डॉ.सतीष कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार), श्रीगंगानगर।