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‘लुटेरे’ पुलिसकर्मी, रिश्वत के लिए व्यवसायी की अंगूठी बिकवाने पहुंचे सुनार के पास

गिरफ्तारी का भय दिखा 2.40 लाख मांगे, व्यवसायी की कार ले गए

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‘लुटेरे’ पुलिसकर्मी, रिश्वत के लिए व्यवसायी की अंगूठी बिकवाने पहुंचे सुनार के पास

‘लुटेरे’ पुलिसकर्मी, रिश्वत के लिए व्यवसायी की अंगूठी बिकवाने पहुंचे सुनार के पास

एटीएम खंगाले, अंगूठी बिकवाने सुनार तक गए
श्रीगंगानगर. जिला साइबर थाने के तीन पुलिसकर्मी रिश्वत के लिए ‘लुटेरे’ बन गए। गिरफ्तारी का भय दिखा कर जयपुर के एक व्यापारी से साढ़े चार लाख रुपए मांगे। मामला 2.40 लाख में सौदा तय कर एक लाख रुपए तत्काल देने को कहा।

पहले परिवादी के साथ एटीएम मशीनों पर घूम-घूम कर 58 हजार रुपए हथियाए। फिर रुपए जुटाने के लिए परिवादी की अंगूठी बिकवाने सुनार तक पहुंचे। व्यवसायी की कार ले गए और रिश्वत की शेष रकम मिलने पर लौटाने की बात कही। इस बीच व्यवसायी एसीबी के पास पहुंच गया।

रिश्वत की शेष रकम के लिए आरोपियों ने जेएलएन मार्ग स्थित डब्ल्यूटीपी पर मिलना तय किया। एसीबी ने जाल बिछाया, लेकिन शातिर पुलिसकर्मियों को भनक लग गई। आरोपी वहां से रफूचक्कर हुए और कार को परिवादी के घर छोड़ कर फरार हो गए। अब एसीबी ने मंगलवार को रिश्वत मांगने का मामला दर्ज किया है।


हुआ यूं कि मालवीय नगर में डायग्नोस्टिक लैब के लिए कलेक्शन सेंटर चलाने वाले अमर सिंह ने किसी के कहने पर अपने खाते में रुपए डलवा कर एटीएम से नकदी निकाल कर दी थी। इसको लेकर जवाहर सर्कल थाने में दर्ज साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने उसे 16 अप्रेल को गिरफ्तार किया था, जिसमें उसे तीन मई को जमानत मिली।

इसके बाद 13 जून को श्रीगंगानगर जिला साइबर थाने के हेड कांस्टेबल नवीन कुमार व कांस्टेबल इंद्रजीत व राकेश उसके यहां पहुंचे। श्रीगंगानगर की टीम एक आरोपी की तलाश के लिए अमर सिंह को लेकर उसकी कार से ही भरतपुर गए।

वहां स्थानीय थाने की मदद से एक स्थान पर दबिश देकर लौटे। रास्ते में उन्होंने अमर सिंह को गिरफ्तारी का भय दिखा साढ़े चार लाख रुपए मांगे। सौदा 2.40 लाख में तय हुआ। जयपुर पहुंचने पर वे सांगानेर के पास एक होटल में ठहरे, जिसका भुगतान अमर से ही करवाया।


भनक लगते ही तेजी से दौड़ाई कार
अमर के ओके मैसेज करते ही पुलिसकर्मी फिर स₹िय हो गए। उन्होंने डब्ल्यूटीपी पर मिलने का संदेश दिया। एसीबी की टीम ने जाल बिछाया। तय समय पर दो पुलिसकर्मी आए। वे कार में बैठे रहे। कुछ देर में ही उन्हें भनक लग गई। उन्होंने कार दौड़ा दी।

एक पुलिसकर्मी अमर के पास आया और थोड़ी देर में आने की कह कर चला गया। कुछ देर बाद अमर के कलेक्शन सेटंर से कर्मचारी का फोन आया कि पुलिस वाले उसकी कार वहां छोड़ गए हैं।


अगले दिन 14 जून को पुलिसकर्मी अमर को लेकर उसके कलेक्शन सेंटर पर पहुंचे। उसने 58 हजार रुपए मालवीय नगर के दो एटीएम से निकाल पुलिसकर्मियों को दे दिए। इस पर पुलिसकर्मियों ने 42 हजार रुपए और मांगे। अमर की सोने की अंगूठी बिकवाने के लिए पुलिसकर्मी उसे एक सुनार के पास भी लेकर गए।

अमर ने समय मांगा तो पुलिसकर्मी यह कह कर चले गए कि रुपए होते ही ओके का मैसेज कर देना। वे उसकी कार भी ले गए। इस बीच अमर एसीबी पहुंच गया। शाम को पुलिसकर्मी फिर आए। बातचीत में अमर ने 42 हजार रुपए 15 जून को तथा बाकी 1.40 लाख रुपए 22 जून तक करने के लिए कहा।


बचाव में उतरी श्रीगंगानगर पुलिस, नहीं दिया सर्विस रिकॉर्ड
मामला दर्ज करने से पहले एसीबी ने आरोपी पुलिसकर्मियों का सर्विस रिकॉर्ड श्रीगंगानगर पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मांगा। बार-बार पत्र लिखने के बाद भी पुलिस ने रिकॉर्ड नहीं दिया।

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