
श्रीगंगानगर.
केसरीसिंहपुरा थाना इलाके में पाक सीमा के नजदीक एक वी गांव में एंटीना व छल्ले पहने मिला संदिग्ध बाज शाहीन फाल्कन प्रजाति का है। इस बाज को अरब देशों में बड़े-बड़े सेंटरों में पाला जाता है। जिनको अच्छी तरह प्रशिक्षित किया जाता है। बंगलूरू के पक्षी विशेषज्ञ राकेश व्यास व धौलपुर के राजीव तोमर ने बताया कि शाहीन, साकर व लेनर प्रजाति के बाज यूरोप व एशिया में पाए जाते हैं। अरब देशों, पाकिस्तान व अन्य देशों में इन तीनों प्रजातियों के बाजों को पाला जाता है।
आबुधावी व कतर आदि स्थानों पर बाजों को प्रशिक्षित करने के बड़े-बड़े सेंटर बने हुए हैं। सीमा के नजदीक मिला बाज शाहीन फाल्कन है। साकर फाल्कन प्रजाति के बाज का सीने पर हल्के सफेद पंख होते हैं। जबकि लेनर प्रजाति का बाज शाहीन व साकर प्रजाति के बाजों से कुछ बड़ा होता है। शाहीन फाल्कन के सीने पर सफेद पंख की बजाय गहरे भूरे पंख होते हैं। सीमा के नजदीक मिला यह बाज शाहीन फाल्कन प्रजाति का है और युवा बाज है। ज्यादातर तो इन बाजों को प्रशिक्षण देकर रेगिस्तान में खरगोश सहित अन्य वन्यजीवों का शिकार कराया जाता है लेकिन इनको प्रशिक्षण देकर अन्य कार्य भी करवाए जा सकते हैं।
यह बाज पालतू होने के कारण आदमी को देखकर ज्यादा उछल कूद नहीं करते हैं। इस संबंध में रेंज कार्यालय में वनकर्मियों ने बताया कि जब उन्होंने बाज को खाने के लिए मीट डाला तो पिंजरे में हाथ दे दिया लेकिन बाज इधर-उधर नहीं हुआ और ना ही घबराया। बीकानेर रेस्क्यू सेंटर भेजा बाज - वनकर्मियों ने बताया कि बाज को मंगलवार सुबह वनकर्मी पिंजरे में डालकर बीकानेर के लिए रवाना हो गए। बीकानेर में बाज को देखरेख के लिए रेस्क्यू सेंटर में रखा जाएगा।
यह बाज शनिवार को केसरसिंहपुर थाना इलाके में एक वी गांव में पाकिस्तान सीमा के पास मिला था। जिसको ग्रामीणों ने पकडक़र पुलिस को सौंप दिया था। जिसको शनिवार रात को श्रीगंगानगर लगाया गया। यहां आकर उसके लगा एंटीना व पैरों से छल्ले निकाल लिए गए। यह वन विभाग के रेंज कार्यालय में रखा गया था। जहां से उसे अब बीकानेर भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारी व जांच एजेंसियां इन छल्लों व एंटीना को लेकर जांच-पड़ताल में जुटी हुई है।
Published on:
22 Nov 2017 07:05 am
बड़ी खबरें
View Allश्री गंगानगर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
