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आरयूबी की लीकेज ठीक कराने की बजाय चित्रकारी की नौटंकी

-आरयूबी की दीवारों पर चित्रकारी में फूंका जा रहा बजट - दोनों आरयूबी में आए दिन भरा रहता है पानी

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श्रीगंगानगर।

इसे लापरवाही कहे या जानबूझ कर समस्या का निदान करने की बजाय हजारों रुपए का बजट फूंकने की नौटंकी? समस्या सामने है, लेकिन उसे अनदेखा कर आनन-फानन में सरकारी बजट ठिकाने लगाया जा रहा है।राज्य सरकार के चार साल पूरे होने पर इलाके में सीएम के दौरे को देखते हुए सरकारी मशीनरी ने राजकोष से बजट खर्च करने में दरियादिली इतनी दिखाने लगी है कि वह मूल समस्या को तो भूल ही चुकी है। जिला प्रशासन के आदेश पर शहर के दोनों आरयूबी की दीवारों को चमकाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मल्टीपरपज स्कूल के पास आरयूबी में पानी लीकेज हो रहा है। यह पानी आरयूबी के पास ए माइनर से रिसाव से आ रहा है। ये समस्या चार साल से लगातार चल रही है।

आए दिन पानी रिसाव से आरयूबी में जलभराव हो जाता है, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। यही हाल गंगासिंह चौक के पास आरयूबी का है, जहां बरसाती पानी की निकासी नहीं हो पाती।नगर परिषद प्रशासन को मजबूरन फायर बिग्रेड की गाडिय़ां मंगवाकर पानी का उठाव करना पड़ता है। इस अस्थायी प्रक्रिया से परिषद प्रशासन को प्रत्येक वर्ष लगभग एक लाख रुपए की चपत लग रही है। बरसाती पानी से दोनों आरयूबी से वाहनों की आवाजाही बाधित होती है। पैदल लोग तो आरयूबी से निकल ही नहीं सकते। इसके बावजूद जिला प्रशासन ने इस गंभीर समस्या का हल करने की बजाय गुरुवार को दोनों आरयूबी की दीवारों पर राजस्थानी परिवेश को दर्शाती भित्ति चित्रकारी करवानी शुरू करवा दी है।

लीपापोती, फिर भी साधी चुप्पी
गंगासिंह चौक और मल्टीपरपज स्कूल के पास आरयूबी की दीवारों पर रंगाई और पुताई के नाम पर हजारों रुपए का बजट बेवजह खर्च करने के संबंध में किसी भी जन प्रतिनिधि ने सवाल नहीं किया है। यहां तक कि इन आरयूबी के पास नगर परिषद में 50 पार्षदों की आवाजाही दिनभर रहती है, लेकिन वे भी मौनी बाबा बन गए हैं। इधर, समाज में जागरूकता का दावा करने वाले अधिवक्ता भी चुप्पी साधे हुए हैं। वहीं विभिन्न संगठन कलक्ट्रेट पर समस्याओं के लिए धरना प्रदर्शन करते हैं, वे भी आंखों के सामने हो रही लीपापोती से अनजान बने हुए हैं।

ऐसी सुंदरता का क्या फायदा?
शहर के दोनों आरयूबी में अधिकतर दिनों में पानी भरा रहता है। इससे वहां कीचड़ की स्थिति हो जाती है। लोग मुश्किल से प्रशासन को कोसते हुए आरयूबी पार करते हैं। जब आरयूबी परिसर ही कीचड़ से सना रहेगा तो दीवारों पर चित्रकारी कौन देखेगा? राहगीरों का ध्यान सामने की ओर रहेगा ताकि वे सुरक्षित आरयूबी पार सके। जब तक दोनों आरयूबी में लीकेज और पानी ठहराव की समस्या दूर नहीं की जाएगी, तब तक इनकी दीवारों को सजाने का कोई औचित्य नहीं है।


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