
श्रीगंगानगर।
शहर में बरसात चार दिन पहले आई लेकिन इसका खमियजा अब तक लोगों को भुगतना पड़ रहा है। पुरानी आबादी के वार्ड तीन में घुटनों तक होने के कारण यह पानी अब संड़ाध मारने लगा है। यहां तक कि अपने घर से बाजार तक आवाजाही के लिए लोगों को मजबूरन इस गंदे पानी में एेसे निकलना पड़ रहा है जैसे वहां बाढ़ आ गई हो। नाले का गंदा पानी भी अब गलियों में इस कदर पसर चुका है कि बीमारी का रूप लेने लगा है। वार्ड तीन, नौ, ग्यारह और चार का अधिकांश पानी वार्ड तीन के गडढे में माइक्रोटावर के आगे से गुजरने वाले मुख्य नाले से पहुंचता है। इस मुख्य नाले से यह पानी वार्ड तीन के गड्ढे में पहुंचता था लेकिन नगर परिषद ने वहां सीसी रोड इतनी ऊंची बना दी कि पानी का बहाव ही बंद कर दिया गया। एेसे में इस गड्ढे की बजाय गलियों में यह पानी पसर चुका है।
निकासी के बंदोबस्त फेल
अब यह पानी घरों की नींव में घुसने लगा है। यही हाल रहा तो पुरानी आबादी का अधिकांश एरिया डूब जाएगा। पानी निकासी के बंदोबस्त फेल हो चुके है। सोमवार को जब पत्रिका टीम ने जायजा लिया तो एेसे हालात नजर आए। यहां तक कि एक भी सफाई कार्मिक वहां पानी निकासी के लिए दिखाई नहीं दिया। कचरा निकालकर उसे उठाव के लिए भी अमला पिछले दस दिनों से नहीं आ रहा है।
प्रयास के सिवाय कुछ नहीं कर सकते
मामले में नगर परिषद प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंगी है। यहां तक कि आयुक्त और सभापति एक दूसरे पर छीँटाकशी कर अपनी जिम्मेदारी से दूर भाग रहे हैं। आयुक्त सुनीता चौधरी ने पुरानी आबादी वार्ड तीन में जलभराव की स्थिति की हालात को स्वीकारा लेकिन हल कराने की बजाय रटरटाया जवाब दिया कि हम तो प्रयास कर सकते हैं, इसके सिवाय कुछ नहीं कर सकते। प्रयास नहीं परिणाम के बारे में जब पूछा तो आयुक्त का कहना था कि यह निकासी पहेली बनी हुई है, अतिक्रमण की बात को स्वीकार करने की बजाय जनता का सहयोग बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
इतनी अंधेरगर्दी कभी नहीं देखी
पिछले चालीस साल इस इलाके में दुकानदारी कर रहा हूं। पानी निकासी की समस्या आती थी लेकिन इस बार इतनी अंधेरगर्दी है कि क्या बताऊं। जिस गड्ढे में पानी जाता था, वहां अतिक्रमण कराने के लिए नगर परिषद के अधिकारियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। एेसे अधिकारियों को सीधा जेल में डाल देना चाहिए।
- सुभाष, दुकानदार
Published on:
03 Jul 2018 06:05 am
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