
फाइल फोटो पत्रिका
Rajasthan News : श्रीगंगानगर के लालगढ़ हवाई पट्टी का विस्तार मौजूदा जगह पर ही होगा। हवाई पट्टी के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने साढ़े सात करोड़ रुपए का बजट जारी किया है। इस राशि से एयर स्ट्रिप और चारहदीवारी के निर्माण के साथ हवाई पट्टी पर यात्री सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। हवाई पट्टी का विस्तार मौजूदा जगह पर करने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। वजह थी बड़े विमानों के टेक ऑफ के लिए मौजूदा हवाई पट्टी की लंबाई बढ़ाने के लिए आसपास जगह नहीं होना।
एयर स्ट्रिप की लंबाई 1300 मीटर से बढ़ाकर 1600 मीटर किए जाने पर इसे एटीआर 72-600 और एटीआर 42-600 की लैंडिंग और टेक ऑफ के लिए उपयुक्त माने जाने पर हवाई पट्टी का विस्तार मौजूदा जगह पर करने का निर्णय हुआ है। एयर स्ट्रीप की लंबाई 1600 मीटर करने के लिए मौजूदा हवाई पट्टी के पास 300 मीटर से अधिक जगह उपलब्ध है।
लालगढ़ हवाई पट्टी के विस्तार की योजना पिछले तीन चार साल से अटकी पड़ी है। भाजपा के शासन में इस हवाई पट्टी से जयपुर के लिए हवाई सेवा शुरू हुई जो महीनेभर चलने के बाद बंद हो गई। कांग्रेस के शासन में हवाई पट्टी के विस्तार के लिए 27 करोड़ रुपए से अधिक की योजना बनी, जो सिरे नहीं चढ़ी। अब प्रदेश की भाजपा सरकार ने बजट घोषणा में लालगढ़ हवाई पट्टी के विस्तार को शामिल करने के बाद 7.50 करोड़ का बजट जारी किया है। नागरिक उड्डयन विभाग जयपुर की टीम दो बार हवाई पट्टी का निरीक्षण कर चुकी है। इस टीम ने लालगढ़ हवाई पट्टी को नागौर और सवाई माधोपुर की हवाई पट्टी से बेहतर बताया था।
1- हवाई पट्टी पर यात्रियों को बीकानेर हवाई अड्डे जैसी सुविधा मिलने लगेगी। अभी इस हवाई पट्टी पर छोटे विमान ही उतर सकते हैं। विस्तार के बाद पचास से सत्तर सीट वाले बड़े विमान उड़ान भर सकेंगे।
2- हवाई पट्टी का विस्तार होने के बाद श्रीगंगानगर जिले के यात्रियों को हवाई सेवा का लाभ मिलने लगेगा। यहां से जयपुर और दिल्ली के लिए हवाई सेवा शुरू होने से जिले के विकास पर भी असर पड़ेगा। भविष्य में अन्य बड़े शहरों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
श्रीगंगानगर में पहली बार हवाई सेवा 1960 में दिल्ली-श्रीगंगानगर के बीच सौ दिन चली। यह विमान सेवा ईगल एयरलाइंस ने शुरू की थी। दूसरी बार यह सेवा 2018 में सुप्रीम एयरलाइंस ने श्रीगंगानगर से जयपुर के बीच शुरू की। दस जुलाई 2018 को शुरू हुई विमान सेवा 3 अगस्त को विमान के रनवे पार कर दीवार से टकराने पर बंद हो गई।
ATR 42-600 - पचास सीट वाले इस मॉडल के लिए आमतौर पर लगभग 1,100 मीटर (3,600 फीट) की एयरस्ट्रीप लंबाई की आवश्यकता होती है। कुछ विशिष्ट मॉडलों और स्थितियों में यह थोड़ी कम या ज्यादा हो सकती है। एटीआर 42-600 को अधिकतम टेक-ऑफ भार और अंतरराष्ट्रीय मानक वातावरण में समुद्र तल पर 1,107 मीटर की एयर स्ट्रीप की आवश्यकता टेक ऑफ के लिए होती है।
ATR 72-600 - 70 सीट वाले इस मॉडल के लिए आमतौर पर लगभग 1,350 मीटर (4,430 फीट) लंबाई की एयरस्ट्रीप की आवश्यकता होती है। एटीआर 72-600 के लिए, बुनियादी टेक-ऑफ दूरी 1,333 मीटर है, जबकि कुछ विकल्पों में यह थोड़ी अधिक हो सकती है। उच्च ऊंचाई या उच्च तापमान जैसी स्थितियां टेक ऑफ दूरी को बढ़ा सकती है।
एटीआर विमानों के लिए एयर स्ट्रीप की लंबाई 1600 मीटर करनी होगी। इसके लिए पश्चिम दिशा में छावनी की तरफ 300 मीटर जगह मिल जाएगी। यह जगह लेने के लिए भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके लिए अलग से राशि जारी करने के बारे में मुख्यमंत्री से बात हुई है। जो बजट जारी हुआ है, उससे एयर स्ट्रीप का निर्माण नए सिरे से होगा। यह काम साल भर में पूरा होने की उम्मीद है।
गुरवीरसिंह बराड़, विधायक सादुलशहर
Published on:
27 Jul 2025 05:47 pm
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