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Sri Ganganagar update: पड़ोस में दिग्गजों को दिखाया घर का रास्ता

Showed the way home to veterans in the neighborhood- झाड़ू दी आई हनेरी , बोहड़ हो गए ढेरी

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Sri Ganganagar update: पड़ोस में दिग्गजों को दिखाया घर का रास्ता

Sri Ganganagar update: पड़ोस में दिग्गजों को दिखाया घर का रास्ता

श्रीगंगानगर. पंजाब की लोक गायिका प्रकाश कौर का एक गीत साठ और सत्तर के दशक में खूब मशहूर हुआ। पुरानी पीढ़ी उस जमाने को याद करते हुए आज भी यदा-कदा उस गीत को गुनगुना लेती है। नई पीढ़ी को तो मूसेवाला जैसे गायक अपने गीतों के माध्यम से या तो दनादन गोलियां चलाने की सीख देते हैं या फिर दो-चार पैग लगाकर ऐश करने की।

प्रकाश कौर का वह पुराना गीत- मैं कतां परीतां नाल चरखा चन्नण दा गुरुवार को पंजाब की जनता ने विधान सभा चुनाव के नतीजों के माध्यम से याद करवा दिया। वाकई पंजाब की जनता ने चंदन के चरखे से ऐसी प्रीत से चला कर सूत काता है कि दिग्गजों के किले भरभरा कर ढेर हो गए।

पांच दरियाओं वाले प्रदेश में झाड़ू ने ऐसी आंधी चलाई कि वहां की राजनीति में अंगद के पांव की तरह जड़ें जमाए बैठे बड़े-बड़े पेड़ उखड़ गए। The broom was given to me, it became a heap
पंजाब में विधानसभा चुनाव के नतीजे अप्रत्याशित नहीं।

जनता वहां बदलाव चाहती थी। कांग्रेस और अकाली दल को जनता ने कई बार सत्ता सौंपी। दोनों ही पार्टियां जनता को सुनहरे सपने दिखा कर बारी-बारी सत्ता में आती रही। लेकिन जो सुनहरे सपने जनता को दिखाए गए वह कभी पूरे नहीं हुए।

हरित क्रांति में सबसे बड़ा योगदान देने वाला यह राज्य कर्ज के बोझ तले दबता गया। खेतों में पसीना बहा कर अन्न उपजाने वाले किसान की हालत भी दिनोंदिन दयनीय होती गई। दूसरी ओर जनता के वोटों की बदौलत सत्ता सुख भोगने वाले नेता अमीर होते चले गए। उनके राजसी ठाठ जनता चुपचाप देखती रही, क्योंकि उसके पास कोई विकल्प नहीं था।

आतंकवाद की आग से उबरे इस राज्य ने पटरी पर आने की कोशिश की तो सत्ता से पोषित ड्रग माफिया ने प्रदेश की युवा पीढ़़ी को नशे के गर्त में धकेल दिया।

आज वहां के बुजुर्ग युवा पीढ़ी को नशे की भेंट चढ़ते देख आंसू बहा रहे हैं परन्तु उनके आंसू न तो कांग्रेस ने पौंछे और न ही अकाली दल ने। दोनों ही पार्टियों के राज में नशा युवाओं को मौत की नींद सुलाता रहा। नशे के लिए एक दूसरे के सिर पर ठिकरा फोड़ने के सिवाय दोनों पार्टियों ने कुछ नहीं किया।

वोट बटोरने के लिए लोकलुभावनी घोषणा करने में दोनों पार्टियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इसका असर धीरे-धीरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा और यह राज्य कर्ज के बोझ तले दबता गया।

वर्ष 2017 में अकाली सरकार की सत्ता से विदाई हुई थी तब 1.82 लाख करोड़ का कर्ज पंजाब पर था। अब यह कर्ज 2.82 लाख करोड़ होने का अनुमान है।

कर्ज की स्थति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पंजाब की कमाई का बड़ा हिस्सा कर्ज का ब्याज चुकाने में ही चला जाता है। ऐसे में जनता ने सत्ता की चाबी जिस पार्टी को बड़ी उम्मीद के साथ सौंपी है उसकी प्राथमिकता कर्ज से उबरने की रहेगी तभी पंजाब फिर से सोहना पंजाब बन पाएगा।

लोकतंत्र में जनता के वोट की ताकत सबसे बड़ी होती है। पंजाब की जनता ने यह दिग्गजों को पटखनी देकर दिखा दी है। पंजाब की राजनीति के पितामह प्रकाश सिंह बादल उस परम्परागत लम्बी सीट से हार गए जहां से हारने की कल्पना उन्होंने शायद ही की हो।

जलालाबाद सीट से उनके पुत्र सुखबीर बादल को भी जनता ने नकार दिया। पटियाला के राजा कैप्टन अमरिन्द्र सिंह को भी जनता ने बता दिया कि दिवास्वप्न दिखा कर राजनीति नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से कांग्रेस को बड़ी उम्मीदें थी। लेकिन जनता ने दो जगह खड़े़ हुए चन्नी पर कतई भरोसा नहीं किया।

चमकौर साहिब से तीन बार चुनाव जीत चुके चन्नी को उन्हीं के नाम राशि चरणजीत ने हराया जो मोबाइल की दुकान पर नौकरी करते हैं और उसके पिता मजदूरी।

यह आम आदमी का ही करिश्मा है। बड़बोले नवज्योत सिंह संधू, मनप्रीत सिंह बादल, बिक्रमजीत सिंह मजीठिया और दलबीर सिंह गोल्डी सहित पंजाब की राजनीति के अनेक दिग्गजों को ऐसे चेहरों ने पराजित किया है जो जनता की नजर में आम थे।

श्रीगंगानगर से सटी अबोहर विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने नए चेहरें के बावजूद जीत दर्ज की है। इस सीट से पूर्व केन्द्रीय कृषि मंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष बलराम जाखड़ के पौत्र संदीप जाखड़ आप के कुलदीप कुमार को पराजित कर कांग्रेस की झोली में एक सीट का इजाफा किया है।

पिछले चुनाव में इस सीट से भाजपा के अरुण नारंग विजयी रहे थे। इस बार अबोहर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बड़ी जनसभा होने के बावजूद भाजपा तीसरे नंबर पर रही है।