श्रीगंगानगर. राज्य से लेकर केन्द्र सरकार तक ‘नशे को ना’ कहलवाने का पूरा प्रयास कर रही है। जहां राज्य सरकार ने नशा मुक्ति के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए हैं, वहीं केन्द्र सरकार ने नशामुक्त भारत अभियान के तहत श्रीगंगानगर जिले को पायलट प्रोजेक्ट में जोड़ा है। ऐसे में अब श्रीगंगानगर के सभी ब्लॉक में 20 मास्टर ट्रेनर लगाए जाएंगे। ये गांव-गांव जाएंगे और नशा मुक्ति के लिए कई आयोजन करेंगे। सरकार इन मास्टर ट्रेनर्स को प्रति कार्यक्रम दो-दो हजार रुपए देगी।
पायलट प्रोजेक्ट के तहत केंद्र सरकार ने श्रींगंगानगर और हनुमानगढ़ समेत प्रदेश के 21 जिले शामिल किए हैं। इसमें पहला चरण जुलाई तक शुरू किया जाएगा। केन्द्र के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से अनुदानित स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से राज्य में कुल 26 गैर सरकारी नशामुक्ति केन्द्रों का संचालन किया जा रहा है।
पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा नशा मुक्ति खोलने के लिए श्रीगंगानगर जिले का चयन किया गया है। चार नशा मुक्ति केन्द्र खोलने के कई पहलू बने हैं। पंजाब और अन्तरराष्ट्रीय सीमा पाकिस्तान पार से नशे की खेप थम नहीं रही है। पिछले आठ से दस सालों में नशे की सप्लाई का यह जिला केन्द्र बन चुका है। पाकिस्तान से हेरोईन की सप्लाई ड्रोन से होने लगी है।हालांकि बीएसएफ और अन्य जांच एजेसिंयों की मदद से तस्करों की धरपकड़ भी हुई है लेकिन नेटवर्क को अब तक खत्म नहीं किया गया है। वहीं पंजाब से नशे की सप्लाई रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने सामूहिक रूप से अपराधियों के खिलाफ मुहिम चलाकर दबिश दी है।
इधर, जिला प्रशासन ने नशा मुक्ति अभियान (मिशन अगेंस्ट नारकोटिक्स सब्सटेंस एब्यूज) ‘मंशा‘ के माध्यम से पिछले साल यह मुहिम शुरू की थी। इस मुहिम में पुलिस के साथ साथ औच्धि विभाग ने भी मेडिकल स्टोर्स की जांच कर कईयों के लाइसेंस निरस्त तो कईयों के निलम्बित भी किए है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार नशे के आदी एक युवक की औसतन मौत हो रही है।
कहां कितने नशा मुक्ति केन्द्र
जिला केन्द्र
श्रीगंगानगर 04
हनुमानगढ़ 01
जयपुर 02
दौसा 02
जोधपुर 01
जैसलमेर 02
सिरोही 01
बाड़मेर 01
कोटा 03
बारां 02
बूंदी 01
भरतपुर 02
करौली 01
सवाई-माधोपुर 02
डूंगरपुर 01