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Video : मुंबई हमले की चश्मदीद को आर्थिक मदद देगा श्रीगंगानगर

मुंबई हमले की एकमात्र चश्मदीद गवाह के जीवन की तस्वीर सामने आने के बाद श्रीगंगानगर के प्रबुद्ध लोगों ने उसे तत्काल आर्थिक मदद देने का निर्णय किया है।

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श्रीगंगानगर.

मुंबई हमले की एकमात्र चश्मदीद गवाह देविका रोटवान के अभावों के जीवन की तस्वीर सामने आने के बाद श्रीगंगानगर के प्रबुद्ध लोगों ने उसे तत्काल आर्थिक मदद देने का निर्णय किया है।तपोवन प्रन्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष और भाजपा नेता महेश पेड़ीवाल इसके लिए 28 नवम्बर को जयपुर से फ्लाइट से मुंबई जाएंगे। हमले के समय देविका महज नौ साल की थी।

पेड़ीवाल ने रविवार शाम को तपोवन ट्रस्ट कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे दो लाख रुपए तुरन्त देविका को सौंपेंगे। इसके बाद उसके परिवार और उससे बातचीत कर उसकी जरूरत का पता लगाएंगे। इसके बाद श्रीगंगानगर वासियों के सहयोग से उसे अधिकाधिक आर्थिक मदद मुहैया करवाई जाएगी।

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पार्टी स्तर पर सुरक्षा मुहैया करवाएंगे

नगर परिषद के पूर्व सभापति पेड़ीवाल ने कहा कि देविका को सोशल और फिजिकल सिक्योरिटी दिलाने के लिए वे पार्टी स्तर पर प्रयास करेंगे और मुंबई सरकार से भी सहयोग दिलवाएंगे।

श्रीगंगानगर ने पहले भी रचा है इतिहास

प्रगतिशील कुम्हार सभा के संरक्षक ज्ञानचंद मारोठिया ने कहा कि 1962 के युद्ध के बाद श्रीगंगानगर आए तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को श्रीगंगानगर वासियों ने सर्वाधिक सोना देकर इतिहास रचा था। शहर देविका की मदद कर एक बार फिर इतिहास दोहराएगा।

इन्होंने भी दिया मदद का भरोसा

जिला प्रगतिशील कुम्हार सभा के अध्यक्ष सुभाष माहर ने 2008 में हुए मुंबई हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। हमारे समाज के एपीपी सुरेन्द्र जलंधरा ने भी एक लाख की मदद की घोषणा की है। संयुक्त व्यापार मंडल अध्यक्ष तरसेम गुप्ता ने भी हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। पत्रकार वार्ता में रतन गणेशगढिय़ा, धीरज सेठ और राजेश अपली भी मौजूद थे।

कौन है देविका

मुंबई हमले के समय देविका ताज होटल में मौजूद थी। उस समय वह महज नौ साल की थी। दस में से नौ आतंकियों को सुरक्षा बलों ने मौके पर ही मार गिराया था। एकमात्र जिंदा बचे आतंकी अजमल कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाने में देविका की गवाही ने अहम भूमिका निभाई थी। देविका ने पैर में गोली लगने के बावजूद बैसाखियों के सहारे चलकर कोर्ट में गवाही दी थी। उसे सम्मान तो खूब मिले परन्तु पर्याप्त आर्थिक मदद नहीं मिलने से वह और उसका परिवार अभावों का जीवन जी रहा है।

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