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राज्य निर्वाचन आयोग की घोषणा, 11 फरवरी को होगा सभापति का चुनाव, नगर परिषद क्षेत्र में आचार संहिता लागू

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नगर परिषद सभापति के उपचुनाव की घोषणा करने से आखिर शहर की सरकार में पिछले एक सप्ताह से चल रहा सियासी ड्रामे का अंत हो गया। अब यह उपचुनाव 11 फरवरी को नगर परिषद परिसर में कराए जाएंगे।
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Political News: राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से नगर परिषद सभापति के उपचुनाव की घोषणा करने से आखिर शहर की सरकार में पिछले एक सप्ताह से चल रहा सियासी ड्रामे का अंत हो गया। अब यह उपचुनाव 11 फरवरी को नगर परिषद परिसर में कराए जाएंगे। शुक्रवार शाम को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नारायण सिंह ने अधिसूचना जारी कर चुनाव की आचार संहिता लागू कर दी है। इस चुनाव की घोषणा से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पार्षदों के वोटों से सभापति की कुर्सी तय होगी। इस संबंध में भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों से संपर्क करने का दौर शुरू हो गया है। देर शाम तक कई पार्षदों को अलग अलग खेमे के अधिकृत जनप्रतिनिधियो ने अपने पक्ष में करने के लिए जोर अजमाइश करने लगे। कई पार्षदों से व्यक्तिगत तो कइयों को सिफारिशी फोन के माध्यम से संबंधित खेमे के लिए मन टटोला है।

इधर, नगर परिषद आयुक्त यशपाल आहुजा ने बताया कि चुनाव आयोग की ओर से आचार संहिता लागू हो गई है। इस आचार संहिता की पालना कराई जाएगी। आचार संहिता शुक्रवार शाम से लागू हो गई है। विदित रहे कि सभापति करुणा चांडक ने 4 दिसम्बर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, ऐसे में डीएलबी ने 20 दिसम्बर को पार्षद गगनदीप कौर पांडे का सभापति पद पर मनोनयन कर दिया था।

तब चुनाव प्रक्रिया टली तो खफा हुए पार्षद
चुनाव आयोग ने 25 जनवरी को नगर परिषद सभापति का उपचुनाव घोषित किया था, इसमें चार फरवरी को चुनाव कराने की प्रक्रिया अपनाने का दावा किया था। लेकिन 29 जनवरी को रिर्टनिंग अधिकारी के बीमार होने पर यह चुनाव एक सप्ताह टालने की घोषणा कर दी। इससे खफा पार्षदों ने मुख्य चुनाव आयोग, केन्द्रीय कानून मंत्री सहित कइयों को शिकायत का दौर शुरू कर दिया।
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हाइकोर्ट तक पहुंचा सभापति का मामला
डीएलबी ने नगर परिषद सभापति के पद पर गगनदीप कौर पांडे को मनोनीत कर दिया था। पांडे ने 22 जनवरी को सभापति का कार्यभार ग्रहण किया, लेकिन 25 जनवरी को चुनाव आयोग की ओर से सभापति के उपचुनाव कराने की घोषणा पर सत्ता पक्ष खफा हो गया और उन्होनें चुनाव की प्रक्रिया टालने का प्रयास किया। इस संबंध में सभापति गगनदीप कौर की ओर से हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की। वहीं तीन पार्षदों विजेन्द्र स्वामी, फहीम हसन और आशा खटीक ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से सभापति का चयन करने का आग्रह किया। इन याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से 28 फरवरी तक जवाब मांगा था।

संख्या बल जुटाने के लिए तीनों खेमे फिर सक्रिय
नगर परिषद बोर्ड में भाजपा और कांग्रेस के पास इतने पार्षदों की संख्या नहीं है कि अकेले सभापति बना सके। ऐसे में निर्दलीय पार्षद अहम भूमिका निभाएंगे। भाजपा खेमे में इस बार विधायक जयदीप बिहाणी सक्रिय नजर आ रहे हैं। वहीं कांग्रेस खेमे के लिए पार्टी जिलाध्यक्ष अंकुर मगलानी और निर्दलीय पार्षदों की कमान समाजसेवी अशोक चांडक ने संभाली है। इन तीनों खेमों ने बहुमत हासिल करने के लिए अधिकाधिक पार्षदों को अपने अपने पक्ष में करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। तीनों खेमों ने अपने चेहते पार्षद को सभापति बनाने के लिए ताकत झोंक दी है।
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दलीय स्थिति
भाजपा 24
कांग्रेस 19
निर्दलीय 22
कुल पार्षद 65