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श्री गंगानगर

नशा तस्करी, खरीद-फरोख्त में सक्रिय आरोपियों की अब खैर नहीं, जाएंगे जेल

- प्रदेश में पहली बार हुई पिट एनडीपीएस एक्ट की कार्रवाई

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श्रीगंगानगर. नशीले पदार्थों के उत्पादन, व्यवसाय, तस्करी या खरीद- फिरोख्त में लगातार सक्रिय रहने वाले आरोपियों की अब खैर नहीं है। पुलिस ने ऐसे अदातन अपराधियों के खिलाफ कमर कस ली है। पुलिस के प्रयास है कि जिले में नशे के कारोबार पर ज्यादा से ज्यादा नियंत्रण लगाया जा सके और तस्करों, बेचान करने वालों, उनकी मदद करने व आर्थिक सहायता पहुंचाने वालों को लंबे समय तक जेल में रखा जा सके। पुलिस ने प्रदेश में पहली ऐसी कार्रवाई को अंजाम तक पहुंचाकर एक आरोपी को पिट एनडीपीएस एक्ट में निरुद्ध किया है।


पुलिस अधीक्षक परिस देशमुख ने बताया कि नशे पर प्रभावी रोकथाम के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा जागरुकता के लिए भी अभियान चल रहे हैं। नशे की रोकथाम के लिए राज्य में पहली बार पुलिस की ओर से पिट एनडीपीएस एक्ट में कार्रवाई करते हुए रेशम सिंह पुत्र बचन सिंह रायसिंह निवासी चक चार बी बड़ी पक्की हिन्दुमलकोट के खिलाफ इस्तगासा तैयार गृह सचिव (विधि) शासन सचिवालय जयपुर को भिजवाया गया था। जिन्होंने आरोपी रेशम सिंह के खिलाफ आदेश करते हुए जेल में निरुद्ध करने के आदेश दिए हैं। जिसको हिन्दुमलकोट थाना पुलिस ने निरुद्ध किया है। जिसको शुक्रवार को जेल में दाखिल कराया जाएगा।


इनके खिलाफ होगी एक्ट की कार्रवाई
– पुलिस अधीक्षक ने बतया कि पिट एनडीपीएस एक्ट के तहत नशा बेचने वालों, नशा रखने वालों, नशा बनाने वालों, एक से दूसरे स्थान पर सप्लाई करने वालों, तस्करों का सहयोग करने वालों तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से उनकी आर्थिक मदद करने वालों, ऐसे अपराधिक षड्यंत्रों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


आरोपियों को किया जा रहा चिह्नित
– पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिले में ऐसे तस्करों व आरोपियों को चिह्नित किया जा रहा है। इसके लिए सभी थानों को ऐसे आरोपियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सूची तैयार होने के बाद इनके इस्तगासे भी गृह सचिव को भेजे जाएंगे। जिससे अधिक से अधिक तस्करों को जेल पहुंचाया जा सके। इस कार्रवाई में मौके पर मादक पदार्थ बरामदगी की आवश्यकता नहीं होती है। कई आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई प्रक्रिया में चल रही है।


ये है एक्ट की कार्रवाई
– प्रिवेंशन ऑफ इल्लिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1988 में धारा 3 में सरकार को किसी व्यक्ति को मादक दवाओं और साइकोट्रोपिक पदार्थों के अवैध व्यापार में शामिल होने से रोकने के लिए हिरासत में लेने का अधिकार देती है। जबकि धारा 10 में अंतरराष्ट्रीस सीमा से 100 किलोमीटर की दूरी की परिधि में नशा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर दो साल तक जेल में निरुद्ध करने की शक्ति है। एक्ट के तहत एक साल तक जमानत नहीं मिलेगी।


स्वास्थ्य व अर्थव्यवस्था पर खतरा हैं ऐसे लोग
– पिट एनडीपीएस एक्ट 1988 के तहत बार- बार अपराध करने पर समाज के लोगों के स्वास्थ्य का खतरा तो होता ही है। इससे सरकार की अर्थव्यवस्था भी काफी ज्यादा प्रभावित होती है। लोगों के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था दोनों को ही इससे खतरा है। जिले में पिछले सालों में भारी मात्रा में हेरोइन, चिट्टा, गांजा, अफीम, नशे की गोलियां बरामद हो रही है।