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Video: आरटीई मेंं फर्जीवाड़ा, कलक्टर करवा रहे हैं जांंच

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) में पिछले दो साल से बिना मान्यता आरटीई के नियमों के विपरित 20 करोड़ रुपए निजी स्कूलों का भुगतान कर दिया गया।

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श्रीगंगानगर.

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) में पिछले दो साल से बिना मान्यता आरटीई के नियमों के विपरित 20 करोड़ रुपए निजी स्कूलों का भुगतान कर दिया गया। इस योजना में स्कूल संचालकों ने तीन वर्ष के बाद 2015 में अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के अंतर्गत मंजूरी का नवीनीकरण करवाना था लेकिन तीन साल बाद भी किसी भी निजी स्कूलों ने इस नियम के तहत नवीनीकरण नहीं करवाया है। अभिभावक संघ ने पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल के नेतृत्व में गुरुवार को जनसुनवाई में हंगामा करते हुए कलक्टर ज्ञानाराम से ही भीड़ गए। कलक्टर ने कहा कि यह ठीक नहीं है इस प्रकरण की एडीएम से जांच करवाई जा रही है।

वहीं निजी स्कूल संचालकों का दावा है कि शिक्षा विभाग ने भौतिक सत्यापन करने के बाद ही भुगतान किया है। आरटीई - 2015-16 से नहीं मिली आरटीई की मान्यता -फिर भी नियमों के विपरित कर दिया भुगतान -आरटीई में अभिभावक संघ का दावा 20 करोड़ का घोटाला -जिले में 1115 निजी स्कूलों में 903 स्कूल संचालकों ने आरटीई में बच्चों के प्रवेश दिया -शिक्षा विभाग अधिकारियों व प्रत्येक तहसील में बैठे नौ ब्लॉक अध्यक्षों की मिलीभगत -जो भुगतान 2015 में रूक जाना था वो भुगतान दो किस्तों में 2015-16 में किया - पहली किश्त नौ करोड़ 49 लाख 31 हजार 837 रुपए का किया भुगतान -दूसरी किश्त 2016-17 में नौ करोड़ 94 लाख 87 हजार 986 रुपए किया है।

राज्य की स्थिति राज्य में स्कूल

24000 -दो साल में राशि बांटी-500 करोड़ क्या है मान्यता नवीनीकरण का नियम--विभाग के नियमानुसार जब तक स्कूलों की मान्यता का नवीनीकरण नहीं हो जाता है,उन्हें पुनर्भरण राशि का भुगता नहीं किया जाना चाहिए था। इसके साथ ही शिक्षा अधिकारियों को यह यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि सरकार इस मामले में आदेश जारी करें। लेकिन हर स्तर पर लगातार नियमों की अवहेलना होती रही।

क्या है मामला

आरटीई अधिनियम लगू होने के बाद सरकार ने सभी निजी स्कूलों को मान्यता दी थी। इस मान्यता के बाद ही निजी संस्थान आने स्कूल में विद्यार्थियों को प्रवेश दे सकते हैं। इसकी एवज में सरकार नि:शुल्क प्रवेशित विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर स्कूलों को पुनर्भरण राशि देती है। स्कूलों को तीन साल की मान्यता दी गई थी, जो वर्ष 2014-15 में समाप्त हो गई थी। अब नियमानुसार सरकार को आरटीई की मान्यता के नवीनीकरण के लिए आदेश जारी करने चाहिए थे और नवीनीकरण के बाद ही स्कूलों को भुगतान किया जाना था लेकिन बिना कोई लिखित आदेश जारी किए अधिकारियों ने मौखित आदेश जारी रके इस राशि का भुगतान कर दिया।

क्या कहना है

अधिकारियों का नहीं है कोई सच्चाई स्वयं सेवी शिक्षण संस्था संघ श्रीगंगानगर की ओर से गत दिवस जिला कलक्टर ज्ञानाराम को ज्ञापन देकर अभिभावक संघ पर निजी शिक्षण संस्थाओं पर आरटीई में फर्जीवाड़ा करने का आरोप सही नहीं बताया है। संघ के अध्यक्ष निहालचंद बिश्नोई और महासचिव ख्यालीराम सहू का दावा है कि अभिभावक संघ ने निजी शिक्षण संस्थाओं पर आरटीई में राशि उठाने के आरोप में कोई सच्चाई नहीं है। राज्य स्तर का मामला निजी स्कूलों की मान्यता समाप्त होने के बाद उनसे स्वयं का घोषणा पत्र ले लिया गया था।

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कई बार निदेशालय के पत्र लिखकर अधिकारियों को स्थिति से अवगत करवाया और मार्गदर्शन मांगा था, लेकिन निदेशालय ने कोई भी स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया और मौखिक आदेश जारी करते हुए पुनर्भरण राशि वितरित करने की बात कहीं थी। इस कारण इन स्कूलों को राशि वितरित कर दी गई। कलक्टर को इसकी रिपोर्ट भेज दी है। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं हुई हैं। शंभूलाल मीणा, आरटीई प्रभारी शिक्षा विभागश्रीगंगानगर। एडीएम से जांच करवाई जा रही है अभिभावक संघ की शिकायत पर आरटीई में फर्जीवाड़ा प्रकरण की एडीएम शहर वीरेंद्र वर्मा से जांच करवाई जा रही है। एडीएम ने इस प्ररकण की जांच शुरू कर दी है। यदि गड़बड़ी साबित हुई तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ज्ञानाराम, जिला कलक्टर,श्रीगंगानगर।

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