
मातृभूमि की सेवा करना हर नागरिक का कर्तव्य
श्रीकरणपुर.
मातृभूमि की सेवा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। इसकी रक्षा के लिए हमें सर्वस्व बलिदान करने को तत्पर रहना चाहिए। यह बात सेना की अमोघ डिवीजन के मेजर जनरल शम्मी राज ने गुरुवार को गांव नग्गी के निकट भारत-पाक सीमा पर हुए आयोजन में कही। उन्होंने रेतीले धोरों के लिए अपने प्राणों की आहूति देने वाले भारतीय सैनिकों को सलाम किया। मेजर जनरल ने 1971 के समय आसपास ग्रामीणों व कस्बावासियों की ओर सेे की गई सहायता को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि सीमावर्ती लोग हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने सेना की आधुनिक तकनीक की जानकारी देते हुए युवाओं को सेना में शामिल होने का आह्वान किया।
बिगुल बजाकर चढ़ाए फूल
नग्गी विजय दिवस की 46 वीं सालगिरह पर सीमा पर बने शहीद स्मारक व मंदिर पर 1971 के धोरों की लड़ाई (सैंड ड्यून) के शहीदों को श्रद्धाजंलि दी गई। बिगुल बजाकर कार्यक्रम का आगाज किया गया। 1971 की लड़ाई के साक्षी रहे रिटार्यड सूबेदार धनवीरसिंह राघव के अलावा सेना की अमोघ डिवीजन के मेजर जर्नल शम्मी राज, कर्नल राजीवनयन सिंह, 15 इंफैन्ट्री के कमांडेंट रितेश बहल, 9 पैरा फील्ड रेजीमेंट के कैप्टन अंकुश अरोड़ा, नायब सूबेदार सुखदीप सिंह व टीए गुरदीप सिंह व अन्य सैन्यकर्मियों ने शहीदों की स्मारक पर पुष्पचक्र व श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान वे काफी भावुक दिखाई दिए।
उन्होंने मंदिर परिसर में बने शहीद स्मारक पर गार्ड सलामी के साथ माल्यार्पण किया। इसके पश्चात दो मिनट का मौन रखा गया। सैन्य अधिकारियों ने स्मारक परिसर में बने दुर्गा मंदिर मंदिर में धोक लगाई। मौके पर बीएसएफ 91 वीं वाहिनी के कार्यवाहक समादेष्टा मयंक उपाध्याय, टूआईसी सुजान सिंह, गांव नग्गी के सरपंच बलराजसिंह डीसी व पूर्व सरपंच रणजीतसिंह साहू सहित अन्य गणमान्य नागरिक भी शामिल हुए।
स्वर्गाश्रम में भी हुआ आयोजन गांव नग्गी के आयोजन से पहले सुबह दस बजे सैन्य अधिकारियों ने यहां स्वर्गाश्रम स्थित स्मारक पर भी पुष्पचक्र अर्पण कर शहीदों को श्रद्धाजंलि दी। इस दौरान यहां भारत मां का जयघोष गूंज उठा। कार्यक्रम में सैन्य अधिकारियों के अलावा पूर्व पालिकाध्यक्ष जुगलकिशोर, लक्ष्मीनारायण जोहिया, भारत विकास परिषद के संदीप गोयल, गोशाला अध्यक्ष खेमचंद गोयल व मानवा सेवा समिति संरक्षक डॉ.हजारीलाल मुटनेजा व अधिवक्ता सुरेश गोयल सहित अन्य नागरिक मौजूद रहे।
प्रतिभाओं का किया सम्मान कार्यक्रम के दौरान सेना की ओर से हुई चित्रकला व हॉफ मैराथन के विजेताओं का सम्मान भी किया गया। फैमिली वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन की अध्यक्ष नीना राज व अन्य सैन्य अधिकारियों ने विजेताओं को पुरस्कृत किया। सूबेदार मेजर पीएस भंडारी ने बताया कि चित्रकला प्रतियोगिता के प्राथमिक वर्ग में अव्वल सुमेधा, निकिता, देव गुप्ता, मिडिल वर्ग में सान्या बिलंदी, खुशबू, काजल चुघ, सीनियर वर्ग में यवनीत कौर, आकांक्षा चौधरी तथा हॉफ मैराथन में विजेता रणजीत सिंह, अशोक सैनी व तुषार स्वामी का सम्मान किया गया। मौके पर सेना की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया।
भारत विकास परिषद के प्रांतीय पदाधिकारी संदीप गोयल, राजेन्द्र सारस्वत, तहसील अध्यक्ष शशिभूषण भास्कर, सचिव दिनेश सती, मुकेश यादव, जगदीश गोयल व बलदेव सैन आदि ने व्यवस्था में सहयोग किया। ...इसलिए मनाया जाता है नग्गी दिवस 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना की करारी हार के बाद सीमा क्षेत्र शांत था। सीमा पर तैनात भारतीय सैना लौट चुकी थी। इसी दौरान युद्ध के दस दिन बाद पाक सेना नापाक इरादों के साथ भारतीय सीमा में घुसी और गांव 36 एच नग्गी के नजदीक रेतीले धोरों में करीब एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र (कोनी टिब्बा क्षेत्र) पर कब्जा कर लिया।
इस पर भारतीय सेना की 4 पैरा बटालियन को क्षेत्र मुक्त करवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। आदेश की पालना में बटालियन के जाबांज सैनिकों ने योजना बनाकर 28 दिसम्बर 1971 को सुबह चार बजे पाक सेना पर हमला बोला और दो घंटे में ही पाक सेना को वापिस घर भेज दिया। युद्ध के दौरान पाक सेना ने तोप से 72 गोले बरसाए इससे बटालियन के 3 अधिकारी व 18 जवान शहीद हो गए। गांव नग्गी के पास धोरों में हुई लड़ाई भारतीय सेना में आज भी विस्मरणीय है।
इसका कारण है कि यह 1971 के भारत-पाक युद्ध समाप्त होने के बाद हुई। रेतीले धोरों में होने के कारण यह लड़ाई भारतीय सेना के इतिहास में सैण्ड ड्यून के नाम से दर्ज है। ऐसे रणबांकुरों की स्मृति में यहां एक स्मारक व मंदिर बनाया गया। सीमा से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित यह स्मारक आज भी युद्ध में प्राण न्योछावर कर चुके वीरों की याद दिलाता है। उनकी स्मृति में प्रतिवर्ष 28 दिसंबर को यह आयोजन किया जाता है।
Updated on:
29 Dec 2017 07:36 am
Published on:
29 Dec 2017 07:16 am
बड़ी खबरें
View Allश्री गंगानगर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
