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SriGanganagar नगर परिषद की दरियादिली, अफसरों की मनमर्जी

The generosity of the city council, the will of the officers- रामलीला की चारदीवारी पर लाखों बजट खर्चा, यहां मरम्मत तक नहीं

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SriGanganagar नगर परिषद की दरियादिली, अफसरों की मनमर्जी

SriGanganagar नगर परिषद की दरियादिली, अफसरों की मनमर्जी

श्रीगंगानगर। नगर परिषद में दबाव की रणनीति अधिक हावी है। इसी वजह से करोड़ों रुपए का बजट खर्च करने के बावजूद शहर की सरकार सवालों के दायरे में हर बार रहती है। खासतौर पर निर्माण कार्य कराने से पहले संबंधित स्थल का भौतिक सत्यापन नहीं किया जाता। शहर के हद्य स्थल कहे जाने वाले सुखाडि़या सर्किल रामलीला मैदान की चारदीवारी की मरम्मत से काम चलाया जा सकता था लेकिन नगर परिषद के अफसरों ने मोटा बजट खर्च करने के लिए ठेकेदार पर मेहरबानी करते हुए 35 लाख रुपए का बजट जारी कर दिया। हालांकि इस चारदीवारी का निर्माण करीब पचास फीसदी हो चुका है और बाकी का काम चल रहा है।

पुरानी दीवार की मोटाई इतनी अधिक थी कि काफी साल बीतने के बावजूद यह दीवार अटल नजर आई है। कारीगरों के मुताबिक इस दीवार पर सिर्फ प्लस्तर से काम चल सकता था लेकिन इसे नया लुक देने के बहाने नगर परिषद प्रशासन ने चेहते ठेका फर्मो को यह टैंडर जारी कर दिया। पुरानी ईंटों और लोहे की एंगल के बारे में अभी हिसाब किताब नहीं किया गया है। पुरानी ईंटों को कहां रखा गया है, यह जानकारी देने के लिए जेईएन से लेकर एक्सईन तक चुप्पी साधे हुए है। इतना जरूर बताया कि फाइनल बिल बनेगा तक पुरानी ईटों के दामों से बिल में कटौती हो जाएगी।
इधर, नगर परिषद के निर्माण शाखा से सटी करीब बाइस फीट लंबी दीवार पिछले दो सालों से टूटी हुई है। रेलवे कॉलोनी से सटी इस दीवार के टूटने से नगर परिषद कैम्पस में कई बार नशेड़ी चोरी कर चुके है। लेकिन नगर परिषद प्रशासन ने दीवार बनाने की बजाय वहां सीसीटीवी कैमरे जरूर लगा दिए पर दीवार का निर्माण नहीं कराया।
इस बीच, शहर के 65 वार्डो में निर्माण कराने के लिए नगर परिषद की निर्माण शाखा हर साल करोड़ों रुपए का बजट खर्च करती है। लेकिन इस शाखा से सटी महज बाइस फीट दीवार गत दो सालों से टूटी हुई है। इस दीवार के निर्माण कराने पर करीब तीस से चालीस हजार रुपए का खर्चा है लेकिन इसे जानबूझकर बनाया नहीं गया। नगर परिषद के कार्मिकों का कहना है कि कई बार आयुक्त और एक्सईएन, एईएन, जेईएन को अवगत कराया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस दीवार के पास ऑटो टीपरो को खड़ा कर दिया, ऐसे में नशेडि़यों के लिए यह टूटी दीवार फायदेमंद साबित हुई। आए दिन नगर परिषद परिसर से नशेड़ी लोहे या ऑटोटीपर में लगे कलपुर्जे चोरी कर रहे है। यहां तक कि नगर परिषद के दोनों गेट में से एक गेट पर चौकीदार की डयूटी लगाकर वहां पहरा तक दिया जा रहा है।