श्रीगंगानगर. पाकिस्तान से हेरोइन तस्करी के लिए श्रीगंगानगर जिले से सटी भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा का इस्तेमाल कर रहे पंजाब के ड्रग माफिया का नेटवर्क पुलिस के नेटवर्क पर भारी पड़ रहा है।यही वजह है कि बाूर्डर से सटे हिन्दुमलकोट से रावला तक पंजाब के ड्रग माफिया के एजेंट पाकिस्तान से मिलने वाली हेरोइन की खेप लेने बेखौफ पहुंच रहे हैं। इसका खुलासा तब होता है जब हेरोइन की डिलीवरी के लिए पाकिस्तानी तस्करों का ड्रोन भारतीय सीमा में घुसपैठ करता है और उसे मार गिराने के लिए बीएसएफ के जवान फायरिंग करते हैं।
श्रीकरणपुर से लेकर घड़साना तक इस साल में अब तक ड्रोन के जरिए हेरोइन तस्करी के डेढ़ दर्जन से अधिक मामले पकड़ में आ चुके हैं। बीएसएफ की सतर्कता से हेरोइन तस्करी के प्रयास विफल हुए, वहीं पंजाब के ड्रग माफिया से जुड़े़ कई एजेंट भी पकड़ में आए। श्रीकरणपुर, रायसिंहनगर और अनूपगढ़ क्षेत्र में तो पंजाब के ड्रग माफिया के लिए काम कर रहे स्थानीय संपर्क भी पकड़ में आए हैं। स्थानीय संपर्कों के बारे में राजस्थान पत्रिका लगातार लिखता रहा है कि जब तक पंजाब के ड्रग माफिया के स्थानीय नेटवर्क को ध्वस्त नहीं किया जाता, तब तक हेरोइन तस्करी का खेल ऐसे ही चलता रहेगा।
पंजाब में ड्रग माफिया की जड़ें बॉर्डर के जिलों फाजिल्का, फिरोजपुर, तरनतारन, अमृतसर और गुरदासपुर में फैली हुई है। वहां सख्ती होने पर ड्रग माफिया ने अपना नेटवर्क राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले से सटी अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों में बना लिया। ड्रग माफिया के मददगार ऐसे लोग बने हैं जो तारबंदी होने से पहले पाकिस्तानी तस्करों के साथ तस्करी में संलिप्त रहे हैं। जल्दी पैसा कमाने की चाह में भी सीमावर्ती गांवों के युवा ड्रग माफिया के चंगुल में फंसे हैं। इनके अलावा अपराधिक गतिविधियों में संलिप्त युवा भी पंजाब के ड्रग माफिया के संपर्क में आए हैं। इस तथ्य से पुलिस अधिकारी भी इनकार नहीं करते।
खेप जाती भी होगी
इस साल में अब तक बीएसएफ और पुलिस ने हेरोइन की जितनी खेप पकड़ी है, उसे देख कर यह कहना गलत होगा कि पाकिस्तानी तस्करों की सभी खेप पकड़ी गई। पाकिस्तानी तस्कर और पंजाब का ड्रग माफिया उनकी हर खेप पकड़ी जाए यह सोच कर तो हेरोइन की तस्करी नहीं कर रहे। बीएसएफ और पुलिस की सतर्कता से कई खेप पकड़ी गई है तो कई पंजाब तक सुरक्षित पहुंची भी होगी और इसमें मददगार पंजाब के ड्रग माफिया का स्थानीय नेटवर्क रहा होगा, जिसे पुलिस बेध नहीं पाई।
योजना सिरे नहीं चढ़ी
पुलिस अधीक्षक परिस देशमुख ने कार्यभार संभालने के बाद पंजाब के र्ड्रग माफिया पर नकेल कसने के लिए योजना का खुलासा पुलिस अधिकारियों की बैठक में किया था। इसके तहत जिले को दो सेक्टर में बांट कर स्पेशल टास्क फोर्स के माध्यम से पंजाब के ड्रग माफिया का नेटवर्क ध्वस्त किया जाना था। एक सेक्टर में हिन्दुमलकोट से केसरीसिंहपुर तक का इलाका तथा दूसरे में गजसिंहपुर से घड़साना तक का इलाका शामिल किया गया। इसके अलावा योजना में जागरुकता कार्यक्रम को शामिल किया गया था। स्पेशल टास्क फोर्स के गठन की योजना सिरे ही नहीं चढ़ी। बॉर्डर के गांवों में जागरुकता कार्यक्रमों के नाम पर स्कूलों में नाटक और गोष्ठियों के अलावा कुछ नहीं हो रहा। स्कूलों में नशे के खिलाफ जागरुकता कार्यक्रम तो पुलिस विभाग दो दशकों से चला रहा है। इसके बावजूद युवा पीढ़ी नशे का शिकार हो रही है।