श्रीगंगानगर. पश्चिमी विक्षोभ के असर से हुई बारिश आमजन में क्षोभ की वजह बन गई। बारिश से मौसम सुहाना हुआ और गर्मी से राहत भी मिली। लेकिन बारिश के पानी की निकासी नहीं होने से जलमग्न हुई सड़कों पर फंसे लोग उन्हें कोसते नजर आए, जिन पर पानी की निकासी की जिम्मेदारी है। जलमग्न हुई सड़कों पर फंसी गाडि़यों और दुपहिया वाहनों को देखकर लगा कि पिछले साल मानसून के दौरान शहर के जो हालात बने थे उससे कोई सबक नहीं लिया गया है जबकि इस साल के मानसून आने में अब मुश्किल से महीना-सवा महीना बचा है। मौसम विभाग के अनुसार श्रीगंगानगर में 21.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। The rain of disturbance, public anger
आसमान पर सुबह से ही बादल छाए हुए थे। साथ में आंधी चलने से धूप बेअसर रही। शाम चार बजे के आसपास अंधड़ के साथ आसमान पर छाई काली घटा से अंधेरा छाने लगा। कुछ देर बाद दिन में ही रात जैसा एहसास काली घटाओं ने करवा दिया। लगभग आधा घंटा तक तेज बौछारों के साथ हुई बारिश से शहर की गलियां और मुख्य सड़कें जलमग्न हो गई। जहां पानी ज्यादा था वहां वाहन ठंडे होकर बंद होने लगे, जिससे जाम की िस्थति बन गई।
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पिछले एक सप्ताह से तप रहे इलाकेवासियों के लिए यह बरसात राहत लेकर आई। शाम जैसे ही बरसात हुई तो बच्चों ने खूब आनंद उठाया। जमकर नहाने लगे। वहीं युवा भी पीछे नहीं रहे। हर किसी के चेहरे खिल उठे। इधर, कई गृहिणियां भी नहाने लगी। उधर, जलेबी, कचौड़ी और समौसे खाने के शौकीनों के लिए यह बरसात सुकून लेकर आई और इन खाद्य सामग्री की दुकानों पर जमकर खरीददारी हुई।
बरसात का दौर जैसे ही शाम पांच बजे शुरू हुआ तो पानी निकासी की समस्या आ गई। सुखाडि़या सर्किल, सुखाडि़या मार्ग, गगन पथ, गोशाला मार्ग, सुखाडि़या सर्किल से शिव चौक तक, पुरानी आबादी ताराचंद वाटिका के पास टावर रोड, सेतिया कॉलोनी, ब्लॉक एरिया, शिव चौक, सूरतगढ़ रोड पर शिव चौक से लेकर बालाजी मूर्ति तक, नई धानमंडी में पानी निकासी की समस्या बनी रही। लोगों शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने के लिए परेशानी झेलते नजर आए। इस बरसात ने नगर परिषद और यूआईटी के पानी निकासी के इंतजामों की हकीकत बयां कर दी। सुखाडि़या मार्ग पर भले ही सीसी रोड और मुख्य नाले का निर्माण हो चुका है, इसके बावजूद यहां पानी की निकासी नहीं होने पर कई सवाल जरूर खड़े किए। इधर, बरसात के कारण अधिकांश लोग अपनी दुकानें बंद कर घरों की ओर रवाना हो गए। सुखाडि़या सर्किल, इंदिरा वाटिका, शिव चौक, ताराचंद वाटिका, ट्रक यूनियन पुलिया पर सामान्य दिनों की तरह रेहडियों पर रहने वाली चहल पहल एकाएक गायब हो गई।
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शहर के कई इलाकों में भवन निर्माण के लिए सड़क किनारे डाले गए मलबा ने पानी निकासी में समस्या में अडंगा डाल दिया। नगर परिषद और यूआईटी ने ऐसे भवन निर्माण करने वाले मालिकों को कभी नोटिस तक नहीं दिया। इन भवन निर्माण स्थलों पर मलबा और भवन निर्माण सामग्री डालने से नालियां ब्लॉक रही, इस वजह से पानी निकासी अटकी रही।
शहर के अधिकांश इलाकों में आरयूआईडीपी की ओर से सीवर और वाटर लाइन बिछाने के दौरान सड़कों के बीचोंबीच गडढे परेशानी के सबब बने। नगर परिषद, यूआईटी और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ साथ जनप्रतिनिधियों की आरयूआईडीपी पर मेहरबानी रही है। इस कारण जनता की सुनवाई नहीं हो रही। सड़कों के किनारे गडढे वाहनों में फंसने की आम बात हो गई। बरसात के बाद आरयूआईडीपी के अधिकारियों ने खोदे गए गडढो की सुध तक नहीं ली।
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इधर, बीरबल चौक का निर्माण चलरहा है। इस कारण चौक से एक साइड में रास्ता बंद कर दिया है। वहीं इस चौक से रवीन्द्र पथ जाने पर वाटर लाइन के लिए खोद गई सड़क बरसात के उपरांत बड़े गडढें में तब्दील हो गई। इससे वाहनों की लंबी कतारें लग गई। रोडवेज और लोक परिवहन बसों की आवाजाही इस रोड से हुई तो गडढे की वजह से जाम जैसी नौबत आई। इन बसों के चालकों ने इस गडढो से बचने के लिए कई बार बस को आगे पीछे भी किया। एक बस चालक ने तो रॉंग साइड से बस को गंतव्य स्थल पर पहुंचाया। वहां ट्रैफिक पुलिस कर्मी मूकदर्शक बन गए। हालांकि ठेका कंपनी एलएंडटी की ओर से प्लास्टिक बेरीकेट्स लगाया गया लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। यहां से गुजरने वाले अधिकांश वाहन चालक और उनमें सवारियां बार बार नगर परिषद और एलएंडटी को कोसती नजर आई।