
श्रीगंगानगर.राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (आरएसआरटीसी) के श्रीगंगानगर आगार से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें आस्था से जुड़े एक कार्यक्रम के नाम पर निगम के नियमों को दरकिनार कर बसों का संचालन किया गया। यह मामला वर्ष 2022-23 का है, जब डेरा सच्चा सौदा के एक कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में बसें चलाई गईं। जांच में सामने आया है कि तत्कालीन मुख्य प्रबंधक दीपक भोबिया के कार्यकाल में निगम के निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई, जिससे निगम को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और आम यात्रियों को असुविधा हुई। इस प्रकरण पर अब निगम मुख्यालय स्तर से विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार 20 सितंबर 2023 को जयपुर के मानसरोवर में आयोजित डेरा सच्चा सौदा कार्यक्रम के लिए श्रीगंगानगर आगार से 30 नियमित बसें चलाई गईं। नियमानुसार ऐसे आयोजनों के लिए बसें आकस्मिक अनुबंध के तहत संचालित की जानी चाहिए थीं, लेकिन इन्हें नियमित सेवा के रूप में चलाया गया। यही नहीं, बसों को निर्धारित मार्ग से हटाकर विभिन्न गांवों से होते हुए जयपुर ले जाया गया, जो मार्ग निर्धारण और लॉगबुक नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 35 बसों से संबंधित राजस्व की नकद राशि अत्यंत कम समय में जमा दिखाई गई, जो व्यवहारिक रूप से संभव नहीं मानी गई। कई परिचालकों ने लिखित रूप में स्वीकार किया कि नकद राशि आगार के कैश काउंटर पर जमा नहीं करवाई गई। इससे न केवल वित्तीय अनुशासन पर सवाल खड़े हुए, बल्कि निगम की राजस्व पारदर्शिता भी संदेह के घेरे में आ गई।
प्रकरण में एक संविदा बस को निर्धारित मार्ग से हटाकर चलाने पर परिवहन विभाग ने बस को जब्त कर 39,878 रुपए का जुर्माना लगाया। इस कारण 17 दिनों तक बस का संचालन बाधित रहा। इसके बाद संबंधित ठेकेदार ने निगम पर 2.15 लाख रुपए का दावा प्रस्तुत कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम से निगम को लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि नियमित बसों को विशेष कार्यक्रम में लगाने के कारण आम यात्रियों को पर्याप्त बस सेवाएं नहीं मिल सकीं। इससे न केवल यात्रियों को परेशानी हुई, बल्कि निगम के नियमित राजस्व पर भी प्रतिकूल असर पड़ा। इसके साथ ही सरकार द्वारा दी गई 26.44 लाख रुपए की रियायती राशि के अनुचित उपयोग की बात भी जांच में सामने आई है।
इस पूरे मामले में निगम के मुख्य प्रबंध निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा ने राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1968 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय की जा रही है।
Updated on:
05 Jan 2026 02:06 pm
Published on:
05 Jan 2026 01:10 pm
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