
सूरतगढ़. वर्तमान में साइबर अपराध लगातार बढ़ रहा है। इसके प्रति आमजन को जागरूक करने की जरुरत है। साइबर ठग आमजन को प्रलोभन देकर उनके अकाउंट को साफ कर देते हैं। राजस्थान पत्रिका की ओर से साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे रक्षा कवच अभियान के तहत शुक्रवार को अदालत कैम्पस में बार संघ न्यायिक सभागार में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में साइबर एक्सपर्ट के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता सहदेव जोशी ने सोशल मीडिया और मोबाइल पर सुरक्षित पासवर्ड तैयार करनेे, सोशल मीडिया अंकाउट हैंकिग, ऑनलाइन स्कैम व भुगतान आदि साइबर अपराधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उनका कहना था कि वर्तमान में साइबर ठगी एक ऐसी अपराधिक गतिविधि है जिसमें इंटरनेट और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके लोगों को धोखा दिया जाता है और उनकी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी चोरी की जाती है। यह एक बढ़ता हुआ खतरा है जो व्यक्तियों, व्यवसायों और सरकारों को प्रभावित कर रहा है। ऐसे लोगों से आमजन को बचने की जरूरत है। साइबर ठगी की रोकथाम के लिए कानून में भी प्रावधान है। साइबर अपराध पर नियंत्रण करने के लिए पुलिस ने भी साइबर सेल बना रखी है। अनचाहे कॉल व मैसेज से बचाव की जरुरत है। उन्होंने बताया कि कुछ वेबसाइट पर लुभावने ऑफर व लालच देकर पैसे ऐंठ लेते हैं। इनसे बचने के लिए किसी भी अनजान लिंक या ऑफर से बचें व अपने बैंक खातों व डिजिटल भुगतान से जुड़े विवरणों को सुरक्षित रखें। इस अवसर परअभियोजन अधिकारी दलीप सहारण, अधिवक्ता सुभाष बिश्नोई, रवि सेकवानी, चाननमल स्वामी, अशोक कालवा, राजकुमार सैन, पकज छाबड़ा आदि ने विचार रखे।
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बार संघ न्यायिक अध्यक्ष राकेश झोरड़ ने कहा कि अपराध का तरीका बदल रहा है। वर्तमान में साइबर ठग सक्रिय है। ऐप के माध्यम से साइबर ठग आमजन से सम्पर्क कर प्रलोभन में फंसाकर खाते से रुपए पार कर लेते हैं। ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राजस्थान पत्रिका सामाजिक सरोकार के तहत समय समय पर अभियान चलाता रहता है। वर्तमान में साइबर क्रॉइम का जाळ की चपेट में आमजन आ रहा है। राजस्थान पत्रिका ने साइबर ठगी पर अभियान चला रखा है। यह अभियान सराहनीय है। इससे साइबर ठगी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। आमजन झूठे ऑफर के चक्कर में ना आए तथा सावधानी से ही ऑनलाइन शॉपिंग करें। बार संघ न्यायिक अध्यक्ष ने बताया कि साइबर ठगी के मामले में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करवाने के लिए आमजन सजगता से आगे आए। ताकि कानून के माध्यम से उन्हें कठोर सजा दिलवाई जा सके।
अधिवक्ता सुनीता शर्मा ने बताया कि ऑनलाइन शॉपिंग की वजह से साइबर ठगी के मामले देश में बढ़ रहे हैं। पूर्व में सिर्फ यूरोपियन देशों में ही साइबर अपराधी सक्रिय होते थे। भारत में साइबर क्राइम में हैंकर सोशल मीडिया के माध्यम से आमजन को चुनकर उनसे सम्पर्क करते है तथा झूठे बातों में फसाकर उनका अकाउंट खाली कर देते हैं। महिलाओं को ऑनलाइन शॉपिंग सहित अन्य कार्य सावधानीपूर्वक करने की आवश्यकता है।
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अधिवक्ता वेदप्रकाश वर्मा ने बताया कि साइबर ठगी के परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं। यदि आमजन की व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी चोरी हो जाती है, तो उसे कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है वितीय नुकसान के तहत हैंकर्स बैंक खाते से पैसे निकाल सकते हैं या क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर सकते हैं। यदि आमजन की व्यक्तिगत जानकारी चोरी हो जाती है, तो ठग जानकारी का उपयोग करके उसके नाम पर ऋण ले सकते हैं या अन्य अपराधिक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। इससे बचने की जरूरत है।
अभियोजन अधिकारी सुरेन्द्र कुलडिय़ा ने कहा कि साइबर ठगी से बचने की जरुरत है। इसके लिए सुरक्षित पासवर्ड का उपयोग करें, अपने ऑनलाइन खातों के लिए सुरक्षित और अद्वितीय पासवर्ड का उपयोग करें।व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें, अपनी व्यक्तिगत जानकारी को ऑनलाइन साझा न करें। इसके अलावा संदिग्ध ई मेल और लिंक से बचें, संदिग्ध ईमेल और लिंक पर क्लिक न करें, क्योंकि वे मैलवेयर या फिशिंग हमलों का हिस्सा हो सकते हैं। आमजन नियमित रूप से अपने खातों की जांच करें, अपने बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड की नियमित रूप से जांच करें ताकि किसी भी अनधिकृत लेनदेन का पता लगाया जा सके। डोट इन पर शिकायत भेजी जा सकती है या नजदीकी पुलिस थाने में अपनी रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है।
बार संघ न्यायिक के पूर्व अध्यक्ष अनिल भार्गव ने बताया कि सामान्य अपराध से साइबर क्राइम बिल्कुल अलग है। इसके लिए राजस्थान पत्रिका की सराहनीय पहल है। समाज हित में ऐसे अभियान बहुत जरूरी है। साइबर ठगी मामले में जांच एजेंसियों को सक्रिय करने की जरूरत है। हालांकि पुलिस की अलग विंग साइबर अपराधियों को पकडऩे व ऑनलाइन ठगी के मामले में रुपए वापस दिलाने का प्रयास कर रही है। लेकिन जांच एजेंसियो को ओर सक्रिय करने की जरुरत है। उन्हें आधुनिक संसाधन उपलब्ध करवाए जाए। ताकि साइबर अपराध पर अकुुंश लग सके।
Published on:
11 Jan 2025 12:00 pm
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