श्रीगंगानगर। अम्बिका एन्क्लेव कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति बहाल नहीं करने पर जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिधियों से शिकायत की लेकिन पीएचईडी ने सुनवाई नहीं की। इससे तंग आकर कॉलोनी के जागरूक नागरिकों ने अदालत की चौखट की शरण ली और परिवाद दायर किया। इस मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने पीएचईडी अधिकारियों को समस्या का हल करने के लिए पाबंद किया और अगली पेशी पर रिपोर्ट मांगी है।
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वार्ड दस में िस्थत अम्बिका एन्क्लेव प्रथम निवासी जिन्द्रपाल सिंह भाटिया जौली पुत्र सोम सिंह भाटिया, पवनप्रीत सिंह पुत्र मनप्रीत सिंह, चंचल उतरेजा पुत्र पूर्णचन्द, शशिकान्त कालड़ा पुत्र दीवान चन्द ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिशाषी अभियन्ता, अधीक्षण अभियन्ता, सहायक अभियन्ता के खिलाफ वाद दायर किया।
इसमें बताया कि पीएचईडी ने अम्बिका एन्क्लेव प्रथम में जल सुविधा के लिए पानी की लाइन सुचारू रूप से भूमिगत पहुंचाई और शुल्क वसूल कर घरों में कनैक्शन दिए है।
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पहले यह कॉलोनी निजी काॅलोनाइजर के अधीन थी तब प्रत्येक घर तक ट्यूबवैल के पानी से सप्लाई की जाती थी। यह पानी पीने के लायक नहीं था, 900 टीडीएस से भी अधिक स्तर का होने के कारण पानी सप्लाई बंद कर दी गई। वर्तमान में पीएचइडी की ओर से बिछाई गई पाइप लाइन से वाटर वर्क्स का पानी सप्लाई किया जाता है। लेकिन पानी सप्लाई प्रभावित हुई तो कॉलोनी की मोहल्ला सुधार समिति ने शिकायत पीएचईडी से 10 अ्प्रेल 2023 को कर दी। इस पर पीएचईडी के अधिकारियों ने आए दिन टालमटोल करने लगे।
यहां तक कि जिला प्रशासन को शिकायत करने के बावजूद अधिकारी यही जवाब देते रहे कि यह कॉलोनी प्राइवेट है, इस कारण पीएचईडी का कोई दायित्व नहीं बनता। पिछले महीने जब मोहल्लेवासियों ने तंग आकर विधिक नोटिस पीएचईडी को दिया लेकिन अधिकारियों ने प्राइवेट कॉलोनी का फिर हवाला देकर 28 लाख रुपए जमा कराने की बात कही।
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याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जब यह कॉलोनी पीएचईडी को सुपुर्द कर दी गई और विभाग में शुल्क जमा करवाकर पानी कनैक्शन लिया गया है तो पानी आपूर्ति देने में पीएचईडी जानबूझकर अड़चन डाल रहा है। इन याचिकाकताओं ने अदालत से वाटर वर्क्स की सप्लाई में टयूबवैल का पानी हटाने के संबंध में गुहार भी लगाई है।
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अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश संख्या दो की अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान पीएचईडी अधिकरियों को टयूबवैल पानी हटाकर वाटरवर्क्स से नियमित पानी की आपूर्ति बहाल करने के लिए पाबंद किया और पानी प्रेशर के संबंध में अगली सुनवाई पन्द्रह जून तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए है।