31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Video : इस बार चाइना का सामान नहीं बेचेंगे तिब्बती

सूरतगढ़ मार्ग पर फिर तिब्बती बाजार लगाया जा रहा है। लगातार पांचवीं बार यहां स्थापित किए जा रहे अस्थायी बाजार के लिए तिब्बती रिफ्यूजी पहुंच गए हैं।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

श्री गंगानगर

•

image

vikas meel

•

Updated: 21 Oct 2017, 9:12 PM IST

tibet market

tibet market

श्रीगंगानगर.

सूरतगढ़ मार्ग पर एक बार फिर तिब्बती बाजार लगाया जा रहा है। लगातार पांचवीं बार यहां स्थापित किए जा रहे अस्थायी बाजार के लिए तिब्बती रिफ्यूजी पहुंच गए हैं।सप्ताहभर बाद बाजार आमजन के लिए शुरू कर दिया जाएगा। इस बार खास बात यह है कि मार्केट में चाइना का सामान नहीं बेचा जाएगा।


सूरतगढ़ मार्ग पर नई धानमंडी की दीवार के साथ-साथ लगने वाले इस मार्केट में 20 दुकानें लगेंगी। इस मार्केट में लगभग 80-90 जनों को साढ़े तीन महीने तक रोजगार मिलेगा। तिब्बती रिफ्यूजी ट्रेडर्स एसोसिएशन ने मार्केट की स्वीकृति के साथ-साथ यहां काम करने के लिए नगर परिषद को करीब पौने तीन लाख रुपए जमा करवाए हैं। तिब्बती बाजार में फिक्स दाम पर स्वेटर, जैकेट, टोपी, मफलर आदि की बिक्री की जाती है।


शहर में 11 वें साल लग रहा बाजार
तिब्बती मार्केट शहर में लगातार ग्यारहवें साल लग रहा है। सूरतगढ़ मार्ग पर यह पांचवें साल लगाया जा रहा है। इससे पहले पब्लिक पार्क और मल्टीपर्पज स्कूल ग्राउंड में मार्केट लग चुका है। तिब्बती शरणार्थियों ने यहां काफी उतार चढ़ाव देखे हैं। तीन साल पहले सूरतगढ़ मार्ग पर लगाए गए मार्केट में शार्ट सर्किट से आगजनी की घटना से सारी दुकानें जलकर राख हो गई थी। तब शहर के दानवीरों और समाजसेवी लोगों ने इनकी मदद की थी।

पांच दिन से जुटे दुकानें लगाने में
तिब्बती मार्केट के लोग 16 अक्टूबर से ही यहां बाजार स्थापित करने के लिए दुकानें लगाने में जुटे हुए हैं। टिन, बांस आदि के सहारे अस्थायी दुकानें बनाने में इन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती है। एसोसिएशन को यहां 15 अक्टूबर से 5 फरवरी तक दुकानें लगाने की अनुमति मिली है।

चीन सीमा पर तनाव बढ़ा तो गुस्साए तिब्बती
इस बार भारत-चीन सीमा पर तनाव बढ़ा तो वर्षों से यहां शरणार्थी के रूप में रहने वाले तिब्बतियों का खून खौल गया। उन्होंने अप्रेल में लुधियाना में बैठक की। इसमें देशभर के लगभग 175 प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से फैसला किया कि वे इस बार चीनी सामान नहीं बेचेंगे। इसी फैसले के अनुरूप श्रीगंगानगर के तिब्बती मार्केट में भी चीनी सामान नहीं बेचा जाएगा।

ऑफ सीजन में करते हैं छोटा-मोटा काम
तिब्बती शरणार्थी गर्म वस्त्रों की बिक्री का सीजन ऑफ होने पर छोटा मोटा काम कर अपने परिवार का पेट पालते हैं। वे अपनी योग्यतानुसार हेंडीक्राफ्ट्स, सेलरी बेसिस और खाने-पीने के होटल आदि पर काम कर गुजर-बसर करते हैं।

तिब्बत पर कर रखा है चीन ने कब्जा
तिब्बत पर चीन ने कब्जा कर रखा है। इसी कारण भारत में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं। भारत-चीन सीमा पर तनाव हुआ तो तिब्बती रिफ्यूजी में रोष फैल गया। उन्होंने सर्वसम्मति से फैसला किया कि चीन का सामान नहीं बेचेंगे। इससे पहले करीब 10 फीसदी चाइना निर्मित सामान की बिक्री करते थे।

-प्रभु डेमडुल, अध्यक्ष, तिब्बती रिफ्यूजी ट्रेडर्स एसोसिएशन, श्रीगंगानगर

बड़ी खबरें

View All

श्री गंगानगर

राजस्थान न्यूज़