
महेन्द्र सिंह शेखावत/श्रीगंगानगर। पाकिस्तान की सीमा से सटे श्रीगंगानगर जिले के ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। सरहदी गांवों के लोग कहते हैं कि इस बार वे कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध करने को तैयार हैं। युद्ध हुआ तो पीछे नहीं हटेंगे। हिन्दुमलकोट में इसी बात की चर्चा है कि पाक को जवाब कैसे दें?
कई बम गिराए, लेकिन गांव छोड़कर नहीं भागे
अनूपगढ़ क्षेत्र में सीमा से ढाई किलोमीटर दूर आबाद गांव 27 ए और 32 ए में ग्रामीणों की चौपाल में अब चर्चा फसल - पानी की न होकर पुलवामा के शहीदों और केंद्र सरकार की ओर से सेना को दी गई खुली छूट की है। 1971 का युद्ध देख चुके गांव नग्गी के मामाराज ने कहा कि उस समय पाक ने नग्गी में कई बम गिराए, लेकिन गांव छोड़कर नहीं भागे। कंधे से कंधा मिलाकर पूरे हौंसले के साथ सेना का सहयोग किया। यही वजह थी कि कुछ ही देर में दुश्मनों को घर का रास्ता दिखा दिया गया।
सेना का हरसंभव सहयोग करने को तैयार
पूर्व सरपंच रणजीत साहू, मनफूल तरड़, चिमन लाल, इंद्राज भाटी, मोहन लाल, कृष्णलाल भुंवाल, मुकेश जालंधरा, कृष्ण लाल, समीर सहू व एडवोकेट कुलदीप बाना आदि ने कहा कि पाक को करारा जवाब देने के लिए वे आज भी सेना का हरसंभव सहयोग करने को तैयार हैं। ग्रामीणों ने भारत मां का जयघोष करते हुए जोश व साहस का परिचय दिया।
आतंकवादी हमले के बाद बढ़ाई सुरक्षा
पुलवामा हमले के बाद भारत पाक अंतरराष्ट्रीय सड़क पर जाने वाले रास्तों पर जवानों ने सुरक्षा बढ़ा दी है। सांझ ढलते ही सीमा सुरक्षा बल के जवान सड़क पर नाका लगाकर सीमा की तरफ जाने वाले हर वाहन को रोक कर वाहन की तलाशी ले रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इन दिनों सीमा सुरक्षा बल के ट्रकों की आवाजाही भी बढ़ी है। इन सबके बावजूद सीमावर्ती गांवों में जनजीवन सामान्य चल रहा है। किसान रोजाना की तरह बिना किसी भय के खेती बाड़ी का कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही ग्रामीण सीमा सुरक्षा बल के जवानों का पूरा सहयोग कर रहे हैं।
Updated on:
21 Feb 2019 11:37 am
Published on:
21 Feb 2019 11:11 am

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