श्रीगंगानगर. जेठ की गर्मी पसीने छुड़ाने वाली होती है। इस महीने में तन को झुलसाने वाली लू को लेकर कहा गया है कि- देखि दुपहरी जेठ की, छाहौं चाहति छांह। मतलब यह कि जेठ की दुपहरी इतनी गर्म होती है कि छांव भी छांव की तलाश करने लगती है। गर्मी की प्रचंडता वाले इस माह का मिजाज इस बार अलग है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से इलाके में लगातार हो रही बारिश ने जेठ की तपन को ठंडा कर दिया है। हालात यह है कि होली के बाद ठंडे पानी से नहाने वाले जेठ के महीने में भी गर्म पानी से नहा रहे हैं।
जहां तक तापमान की बात है तो जेठ के महीने में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। न्यूनतम तापमान भी 30 डिग्री सेल्सियस या इससे थोड़ा बहुत ऊपर नीचे रहने से टंकियों में भरा पानी उबलने लगता है और उसके ठंडा होने पर नहाना पड़ता है। इस बार तो टंकियों का पानी इतना ठंडा है कि बिना गर्म पानी मिलाए नहाने को जी नहीं करता। बुजुर्गों का कहना है कि जेठ के महीने में ऐसी शीतलता उन्होंने अपने जीवन में नहीं देखी।
गर्मी के मौसम में गर्मी नहीं पड़ने से लोग खुश हैं, लेकिन खेती के लिए यह मौसम विपरीत है। शगुन विचार करने वालों की मानें तो 25 अप्रेल से 8 मई के बीच बारिश हो तो भीषण अकाल पड़ता है और रोजी रोटी के लिए पति को अपनी पत्नी को छोड़कर जमाने वाली जगह जाना पड़ता है। मौसम का रुख तो यही इशारा कर रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण मार्च से शुरू हुआ बारिश का दौर मई को पीछे छोड़ जून मे भी चलते रहने का संकेत दे रहा है। लगातार हो रही बारिश से नरमा की फसल चौपट हो रही है। मानसून सूखा रहा तो सावणी की फसल भी नहीं होगी।
अतिवृष्टि और ओलावृष्टि के कारण तापमान में लगातार गिरावट आ रही है। बुधवार रात करीब पौने 12 बजे तेज बारिश का दौर शुरू हुआ, जो देर रात तक जारी रहा। वहीं, बिजली गुल होने से सड़कों पर अंधेरा पसर गया। यही हाल गुरुवार को रहा। अल सबेरे से ही हल्की बरसात का दौर शुरू हो गया। हालांकि सुबह दस बजे के बाद तेज धूप भी आई लेकिन दोपहर बारह बजे फिर से आसमान में बदलों ने डेरा डाल लिया। तापमान में इतनी गिरावट आई कि श्रीगंगानगर में शिमला जैसा एहसास हुआ। अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस तथा न्यूनतम तापमान 21.5 डिग्री सेल्सियस रहा। बारिश का दौर अभी 3 जून तक चलने की संभावना है।