श्रीगंगानगर। करीब आठ साल पहले इलाके में एक किशोरी को अपने प्रेमजांल में फांसकर शादी का झांसा देकर अगुवा कर दुष्कर्म करने के जुर्म में अदालत ने एक जने को दोषी मानते हुए दस साल सश्रम कारावास व पचास हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है। यह निर्णय यहां पोक्सो प्रकरणों की स्पेशल कोर्ट संख्या एक के स्पेशल जज सुरेन्द्र खरे ने सुनाया है।
विशिष्ट लोक अभियोजक गुरचरण सिंह रूपाणा ने बताया कि 15 अक्टूबर 2015 को महिला पुलिस थाने में पीडिता के पिता ने बी ब्लॉक निवासी अमन उफ अमनदीप सिंह पुत्र गुरदीप सिंह मेहरा के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इसमें बताया कि उसकी करीब पन्द्रह-सौलह साल की बेटी को अमनदीप सिंह भगा ले गया है। इनकी तलाश के बावजूद अब तक सुराग नहीं मिला है।
इस संबंध में पुलिस ने जांच की तो खुलासा हुआ कि पीडि़ता के परिजनों के साथ अमनदीप सिंह की जान पहचान थी। इस दौरान उसने इस किशोरी को अपने प्रेम जांल में फांस लिया और शादी का झांसा देकर 5 अक्टूबर 2015 की रात को चुपके से बस में सवार होकर दिल्ली ले गया। वहां से चंडीगढ़ सहित पंजाब के कई शहरों में होटलों में रूके और किशोरी से जबरन दुष्कर्म किया।
जब पैसे खत्म हो गए तो वापस लौट आए। पुलिस ने आरोपी को काबू कर किशोरी को दस्तयाब किया। इसके बाद पीडि़ता की मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। पुलिस ने आरोपी अमनदीप सिंह के खिलाफ 30 नवम्बर 2015 को अदालत में चालान पेश किया। अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान पीडि़ता समेत पन्द्रह गवाह और 21 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।
अदालत ने आरोपी अमनदीप सिंह पुत्र गुरदीप सिंह मेहरा को दोषी मानते हुए आईपीसी की धारा 376 में दस साल सश्रम कारावास व पच्चीस हजार रुपए जुर्माना, धारा 363 में पांच साल कठोर कारावास व दस हजार रुपए जुर्माना, धारा 366 में सात साल कठोर कारावास व पन्द्रह हजार रुपए जुर्माने की सजा से दंडित किया। जुर्माना जमा होने पर पीडि़ता को बतौर क्षतिपूर्ति देने के आदेश भी दिए। इस मामले में आरोपी जमानत पर था।