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महिला दिवस: चिकित्सक से बनी हमारी कलक्टर

- श्रीगंगानगर में प्रशासक के रूप में बनाई अलग पहचान

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श्रीगंगानगर. राजस्थान के झुंझुनू की बेटी डॉक्टर मंजू 2016 में चयनित न सिर्फ आईएएस अधिकारी है बल्कि पहले से डॉ मंजू जाखड़ स्त्री रोग विशेषज्ञ भी है। डॉ मंजू चौधरी श्री गंगानगर में कलक्टर के पद पर कार्यरत है। यहां भी डॉ मंजू प्रशासनिक कार्यो के अलावा समाज के उद्धार के लिए नशा मुक्ति जागरूकता अभियान चलाया है। मंजू की पहली पोस्टिंग आदिवासी इलाके, उदयपुर में हुई थी। श्रीगंगानगर में किसानोें की समस्या हो या फिर प्रशासन के रूप में कामकाज, हर क्षेत्र में पहल करते हुए फीडबैक लेती है ब​ल्कि संजीदा भी है। कलक्टर मंजू का कहना है कि महिलाओं को अपने आपको किसी भी मामले में खुद को कमजोर नहीं समझना है और महिलाएं ज्यादा इच्छाशक्ति है। किसी भी मामले में पुरुषों से कम नहीं है। जो भी सपने है उनको पूरा करने में कोई भी बाधा नहीं आ सकती है। महिलाओं में सहनशीलता, एंगर मैनेजमेंट, हार्ड वर्किंग और टाइम मैनेजमेंट अच्छा करती है।
सफलता का श्रेय परिवार को
दिल्ली के तेग बहादुर अस्पताल में चिकित्सक की नौकरी करते करते सिविल सर्विस में पहले ही प्रयास में 59वीं रैंक हासिल करके इतिहास रचा था। मंजू अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को देती हैं। डॉ मंजू के भाई अनिल श्योराण आईपीएस है, डॉ मंजू का मानना है कि परिवार के साथ ससुराल पक्ष का सपोर्ट भी मायने रखता है, यूपीएससी में सिलेक्शन होने में ससुर और पति डॉ सुरेश जाखड़ (शिशु रोग विशेषज्ञ) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
समाजसेवा के लिए हुई सम्मानित
समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाने वाली महिला अधिकारी कलक्टर डॉ मंजू चौधरी को राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा गोल्ड मैडल प्रदान कर सम्मानित किया जा चुका है।

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