
विश्व एड्स दिवस: रेड जोन के दायरे से बाहर नहीं आया हमारा जिला
#World AIDS Day जिले में एचआईवी पॉजिटिव यानि एड्स (एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम) रोग से पीड़ित रोगियों की संख्या अधिक होने से प्रदेश में रेड जोन (खतरनाक क्षेत्र) की श्रेणी में है। करीब सोलह साल से इस इलाके में रोगियों की संख्या कम होने की बजाय लगातार बढ़ रही है। राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी की ओर से जिला मुख्यालय पर विशेष सैँटर एआरटी सेंटर स्थापित किया गया हैं। इस सेंटर के अनुसार वर्ष 2014 से लेकर अब तक करीब नौ सालों में 348 पीडि़तों की मौत हो चुकी हैं। एचआईवी के बढ़ते आंकड़े चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन गए हैं। चिट़्टा और मेडिकेडेटड नशे की डबल डोज करने के लिए नशेड़ी आदी हो चुके हैं। एक ही इंजेक्शन की सीरिंज इस्तेमाल किए जाने से एचआईवी रोगी भी बनते जा रहे हैं, यह पुलिस के साथ साथ चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन रहे है।
पहचान उजागर करने पर सजा का प्रावधान
एड्स पीडि़तों की संख्या सार्वजनिक नहीं किए जाने की गाइड लाइन बनी हुई हैं। यहां तक कि बाल अपराधियों की तर्ज पर एड्स पीडि़तों की पहचान नहीं हो, इसके लिए बकायदा वर्ष 2017 में एक्ट भी बना हुआ हैं। इसमें एड्स पीडि़त का नाम उजागर करने या भेदभाव करने पर तीन माह कारावास व एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इस कारण यह आंकड़ा जारी नहीं किया जा रहा है। हालांकि जिले में करीब ढाई हजार लोग उपचार ले रहे हैं। इसमें श्रीगंगानगर ब्लॉक पहले पायदान पर है। दूसरे स्थान पर अनूपगढ़, तीसरे पर रायसिंहनगर, चौथे पर पदमपुर, पांचवें पर घड़साना, छठे पर श्रीकरणपुर, सातवें पर सूरतगढ़ और आठवें स्थान पर सादुलशहर ब्लॉक एरिया शामिल है।
पूरे प्रदेश में 36 केन्द्र स्थापित
राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी की ओर से 27 जिलों में 36 केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा जयपुर और उदयपुर में चार-चार, जोधपुर में दो केन्द्र शामिल हैं। दवा या सूचना के लिए टोल फ्री नम्बर 1097 स्थापित किया गया हैं। श्रीगंगानगर एआरटी सेंटर के मेडिकल ऑफिसर आईपी पूनियां का कहना है कि जहां ज्यादा नशेड़ी, सैक्स वर्कर या बाहरी लोगों का ठहराव अधिक होता है, वहां एड्स के होने की ज्यादा संभावना रहती हैं। पंजाब और अन्तरराष्ट्रीय बॉर्डर एरिया होने के कारण बाहरी लोगों की आवाजाही इस जिले में अधिक रहती हैं। इस कारण पिछले सौलह सालों से हमारा जिला रेड जोन के दायरे से बाहर नहीं निकल रहा।
Published on:
30 Nov 2023 11:36 pm
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