
datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)
- 2019-20 में 40 हजार हेक्टेयर में मचा था कहर, अब पाकिस्तान सीमा से आने वाले खतरे पर विभाग की पैनी नजर
जितेंद्र ओझा.
सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर). पांच साल पहले पाकिस्तान की ओर से आए टिड्डी दल ने किसानों की मेहनत पर कहर बरपाया था। वर्ष 2019-20 में सूरतगढ़ सहित श्रीगंगानगर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में करीब 40 हजार हेक्टेयर भूमि तक टिड्डियों का फैलाव हुआ था। चना, ग्वार, सरसों, जौ और गेहूं की खड़ी फसलों को चट करने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। गनीमत रही कि इसके बाद से क्षेत्र में टिड्डियों का कोई बड़ा हमला नहीं हुआ, बावजूद इसके टिड्डी सह एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र ने निगरानी और सर्वे का सिलसिला जारी रखा है।
बीकानेर रोड स्थित टिड्डी सह एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र की टीम निर्धारित समय पर सीमावर्ती क्षेत्रों का सर्वे करती है। खैरुला, सखी, गोवर्धन और केके टिब्बा सहित अन्य क्षेत्रों में टिड्डियों की संभावित गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। जोधपुर स्थित क्षेत्रीय टिड्डी सह आइपीएम केन्द्र से भी सूरतगढ़ सहित प्रदेश के सभी नौ केन्द्रों को समय-समय पर अलर्ट और दिशा-निर्देश दिए जाते हैं।
दुनिया के हालात पर भी नजर
केन्द्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार देश में 225 स्थानों पर टिड्डी गतिविधियों को लेकर सर्वे किया गया, लेकिन कहीं टिड्डियां नहीं मिलीं। वहीं, दक्षिण अफ्रीकी देश मोरक्को में बड़े पैमाने पर टिड्डियां मिलने पर 87,363 हेक्टेयर क्षेत्र में नियंत्रण कार्य किया गया। मॉरिटानिया में 98 हेक्टेयर में अलग-अलग टिड्डियां देखी गईं। दक्षिण-पूर्वी ईरान में भी छिटपुट टिड्डियां मिलीं। आने वाले समय में अधिकांश समूहों के अल्जीरिया और मॉरिटानिया की ओर प्रवास की संभावना जताई गई है।
1994-95 में भी बरपा था कहर
श्रीगंगानगर जिले में टिड्डियों का पुराना इतिहास भी कम भयावह नहीं है। वर्ष 1994-95 में करीब एक माह तक टिड्डी दल ने क्षेत्र में डेरा डाला था। स्टेट फार्म की करीब छह हेक्टेयर भूमि में तैयार अमरूदों का बाग तक नष्ट हो गया था। नियंत्रण के लिए दिल्ली से हेलीकॉप्टर मंगवाकर कीटनाशी का छिड़काव कराया गया था।
फिलहाल हमले की आशंका नहीं
क्षेत्र में फिलहाल टिड्डियों के हमले की आशंका नहीं है। किसानों को फसलों में लगने वाले हानिकारक कीट एवं व्याधियों से बचाव के लिए जागरूक किया जा रहा है। टिड्डी नियंत्रण के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं।
-डॉ. सूरज करण चौधरी, वनस्पति संरक्षक एवं प्रभारी, टिड्डी सह एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केन्द्र, सूरतगढ़
Updated on:
12 Aug 2026 06:00 am
Published on:
12 Aug 2026 06:00 am
