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Technology गाजियाबाद के सीवरों से निकलने वाली जहरीली गैस से चलेंगे नगर निगम के वाहन

Technology : GDA पीपीपी मॉडल पर डूंडाहेड़ा में प्लांट लगाएगा। यहां सीवरेज के कचरे से निकलने वाली गैस को बायो सीएनजी में कनवर्ट किया जाएगा।

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Ghazibad

प्रतीकात्मक फोटो ( स्रोत Gemini )

Technology गाजियाबाद में अब वाहन डीजल-पेट्रोल से नहीं बल्कि सीवर से निकलने वाली जहरीली गैस से चलेंगे! इसके लिए गाजियाबाद नगर निगम पीपीपी मॉडल पर बायो सीएनजी प्लांट लगाने जा रही है। इस प्लांट में सीवर से निकलने वाले मलबे और गंदे पानी से बायो सीएजी गैस बनाई जाएगी। इसके बाद इस गैस को नगर निगम के वाहनों में फिल किया जाएगा। दावा किया जा रहा है कि यह प्लांट इतना उत्पादन करेगा कि नगर निगम के सभी वाहन इससे संचालित हो सकेंगे।

डूंडाहेड़ा में लगेगा प्लांट

यह प्लांट गाजियाबाद के डूंडाहेड़ा में स्थित सीवरेज प्लांट पर ही लगेगा। यहां सीवर के पानी और मलबे से इस प्लांट में बायो सीएनजी बनाई जाएगी और फिर इसे साथ ही साथ टैंकों में स्टोर करके सीधे वाहनों में फिल कर दिया जाएगा। प्लानिंग के अनुसार इस प्लांट में प्रतिदिन पां हजार किलो तक बायो सीएनजी बन सकेगी। यह इतनी क्षमता है कि नगर निगम के 90 प्रतिशत वाहनों को संचालित कर सकेगा। जनवरी माह में नगर निगम इस प्रोजेक्ट का वर्क ऑर्डर जारी करेगा। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही यह योजना परवान चढ़ेगी और2926 में नगर निगम गाजियाबाद के वाहन सीवरेज से निकलने वाली जहरीली गैस से चलेंगे।

कई योजनाएं नए साल में देगा जीडीए

गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सचिव विवेक मिश्रा ने इस योजना की पुष्टि करते हुए बताया है कि जीडीए ने वर्ष 2025 में काफी काम किया है। वर्ष 2026 में प्रस्तावित हरनंदीपुरम टाऊनशिप प्रमुख है। हरनंदीपुरम योजना को तीन से चार माह में ही लॉच करने की योजना है। इसके साथ ही पीपीपी मॉडल पर जलकल विभाग के साथ मिलकर बनाए जा रहे बायो सीएनजी प्लांट का वर्क ऑर्डर भी जल्द जारी होने जा रहा है। इस यूनिट में हरे कचरे पर उत्पादन निर्भर करेगा। अगर गीला कचरा पर्याप्त मात्रा में मिलता है तो उसका उत्पादन पांच हजार किलो गैस प्रतिदिन तक जाने की उम्मीद है। सामान्य कम से कम उत्पादन 1500 रहेगा।