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पर्यटकों को और रोमांचित करने की तैयारी में जम्मू सरकार 

कश्मीर घाटी ही नहीं जम्मू और लद्दाख के इलाके में भी कई ऐसे स्थल हैं, जिन्हें पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। 

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Jyoti Kumar

Apr 16, 2015

जम्मू-कश्मीर सरकार ने पर्यटकों को आकिर्षित करने के लिए नई जगह को पर्यटकों के लिए खोलने की कवायद शुरू कर दी है ताकि पिछले साल आई प्रलंयकारी बाढ़ के बाद एक बार फिर घाटी में पर्यटकों की चहल पहल पहले की तरह हो जाए।

ट्रेवल एंड टूर एजेंसी मेक माई ट्रिप के तत्त्वावधान में आयोजित कार्यक्रम 'रिडिस्कवर कश्मीर' के दौरान राज्य के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने कहा कि सरकार प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई उपाय कर रही है।

इसमें सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ ही नए पर्यटन स्थलों को खोलना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी ही नहीं जम्मू और लद्दाख के इलाके में भी कई ऐसे स्थल हैं, जिन्हें पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में प्राकृतिक जलाशयों के साथ रंजीत सागर और बगलिहार जैसे मानवनिर्मित जलाशय भी काफी खूबसूरत हैं।

अख्तर ने कहा कि पर्यटकों के लिए सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चरों को बेहतर बनाने की जरूरत है और इस दिशा में काम शुरू भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि सड़कों तथा मनोरंजन की सुविधा बेहतर बनाने की आवश्यकता है।

जम्मू-कश्मीर के पर्यटन निदेशक फारुख शाह ने बताया कि इस साल 01 मई से गुरेज को पर्यटकों के लिए खोलने वाली है। श्रीनगर से 123 किलोमीटर दूर स्थित गुरेज पहले पर्यटकों का पसंदीदा स्थल हुआ करता था, लेकिन पिछले 24 साल से यहां पर्यटन बंद पड़ा था।
कोकरनाग को भी पर्यटकों के लिए खोला जाएगा। साथ ही अन्य स्थलों को भी पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने या पर्यटकों के लिए खोलने की योजना है।

फारुख ने बताया कि पिछले साल जम्मू कश्मीर में एक करोड़ से भी ज्यादा लोग तीर्थ स्थलों पर गए, जिनमें सबसे ज्यादा वैष्णो देवी तथा अमरनाथ यात्री थे। इनके अलावा 11 लाख 50 हजार लोग घूमने के उद्देश्य से राज्य में आए थे। उन्होंने कहा कि पिछले साल आई बाढ़ का कहर समाप्त हो चुका है और कश्मीर घाटी अब पहले की तरह की खूबसूरत है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल पर्यटकों की संख्या और बढ़ेगी। फारुख ने कहा कि विदेशी पर्यटकों के मुकाबले घरेलू पर्यटक वहां ज्यादा संख्या में आते हैं और राज्य सरकार का फोकस भी घरेलू पर्यटकों पर है।

उन्होंने कहा कि घरेलू पर्यटक राज्य के पर्यटन उद्योग की रीढ़ हैं। इसमें महाराष्ट्र और गुजरात से अच्छी खासी संख्या में पर्यटक वहां पहुंचते हैं। कार्यक्रम में मौजूद श्रीनगर के शिकारे वाले राजा ने मीडिया से अपील की कि घाटी के एक कोने में कोई दुर्घटना हो जाए तो वह पूरे प्रदेश को असुरक्षित घोषित न करे।

उन्होंने कहा कि प्रदेश बहुत बड़ा है। राजा ने बताया कि 2012 तक घाटी में कारोबार अच्छा चल रहा था और व्यस्त मौसम में खाना खाने तक की फुर्सत नहीं होती थी। उन्होंने याद किया कि पहले मार्च आते ही वह शिकारे को रंगते थे, नए कपड़े लगाते थे लेकिन 2013-14 के बाद से पर्यटकों की संख्या में कमी आई है।

उन्होंने कहा कि यहां नियमित आने वाले पर्यटकों को फोन करने पर वे कहते हैं कि घाटी का पैकेज काफी महंगा हो गया है। राजा ने कहा कि अब तो सुबह घर से निकलते हैं और शाम को मायूस लौटते हैं। कश्मीर में जन्मे अभिनेता संजय सूरी ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि यह वाकई धरती का स्वर्ग है और लोगों से अपील की कि वे निङ्क्षश्चत होकर वहां जाएं।