
इसलिए पड़ा मांडवा नाम: मांडवा एक रेतीला गांव है। बुजुर्गों की मानें तो इसकी उत्पत्ति मांडू द्वारा हुर्इ थी। जो एक प्रभावी जाट था। ऐतिहासिक तथ्यों में यहां की खूबसूरती से जुडी और बातें भी सामने आती हैं, जिनमें लोगों की आर्कषक कलाकारी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। मांडू ने पहले यहां एक छोटे से गांव की स्थापना की थी बाद में इसे कस्बे के रूप में परिवर्तित किया गया। आगे देखें अद्भुत है स्वर्ण पत्तियों की सजावट.....

अद्भुत है स्वर्ण पत्तियों की सजावट: झुनझुवाला हवेली, जो हवामहल, सिटी पैलेस, आमेर पैलेस और उदयपुर पैलेस की खूबसूरती पर भी भारती पडती है, में एक खूबी अहम है। मुख्य प्रांगण में स्थित कमरे को स्वर्ण पत्तियों से सजाया गया है। इसके अलावा स्वर्ण धारियां और चित्रकारी भी चार चांद लगाते हैं। मांडवा की इस हवेली के अलावा यहां और भी शानदार नमूने हैं, जिनमें हनुमान प्रसाद गोयंका हवेली,गोयंका डबल हवेली, मुरारिया हवेली, मोहनलाल सराफ हवेली, गुलाब राय लाडिया हवेली आदि प्रसिद्ध हैं। अब आपको यकीन दिलाने के लिए कि क्यों जो भी यहां इसे देखने आता है वो बस एकटक इसे देखता ही रहता है। आगे निहारें तस्वीरों में, इस खूबसूरत कस्बे की खूबसूरती के कुछ नज़ारे –

शेखावटी उत्तर-पूर्वी राजस्थान का हिस्सा है। यह क्षेत्र जयपुर, दिल्ली व बीकानेर के तिकोन के बीच में आता है और ‘द ओपन एयर आर्ट गैलरी’ के नाम से मशहूर है। आगे चलिए और जानिए कौन-कौन से खूबसूरत शहर इसमें पडते हैं –

इसमें नवलगढ़, मांडवा, झुंझुनू, फतेहपुर, डंडलोड़, मुकंदगढ़, जैसे शहर आते हैं। राजस्थान का यह रंगीला क्षेत्र अपनी 18वीं और 19वीं सदी की हवेलियों के लिए मशहूर है। अगली स्लाइड क्लिक कर देखें और…

मारवाड़ियों और राजपूत व्यापारियों की ये हवेलियां दीवारों पर हुई खास पेंटिंग्स के लिए जानी जाती हैं। इसके अलावा, यहां के किले, खूबसूरत मंदिर, बावड़ियों वगैरह भी दर्शनीय हैं। अगली स्लाइड क्लिक कर जानिए यहां खाने की कौन सी चीज प्रसिद्घ है…

इतना ही नहीं, यहां का वेजिटेरियन कुजीन भी बेहद स्वादिष्ट होता है। यहां का नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर है, जहां से इसकी दूरी लगभग 150 किमी है, तो इस क्षेत्र में रेल के जरिए भी पहुंचा जा सकता हैं। अगली तस्वीर पर जानिए कैसे ठहर सकते हैं।