
CG News: आवासीय संस्थाओं में अध्ययनरत आदिवासी छात्रों को मिलने वाली शिष्यवृत्ति और भोजन सहायता राशि में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) ने इस बंदरबांट के खिलाफ कलेक्टर से शिकायत की है, जिसमें विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
संगठन ने कलेक्टर से इस मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। छिंदगढ़ ब्लॉक से एक ऑडियो वायरल हुआ है, जिसमें मंडल संयोजक एक छात्रावास अधीक्षक से प्रति छात्र 50 रुपये प्रतिमाह वसूलने की बात कर रहा है। यह वसूली शिष्यवृत्ति और भोजन सहायता के नाम पर की जा रही है।
इसी तरह के मामले बीजापुर और बस्तर जिलों में भी सामने आ चुके हैं। CG News एआईएसएफ के अनुसार, जिले में लगभग 13,000 से अधिक छात्र आवासीय छात्रावासों और पोटाकेबिनों में रहते हैं। इन छात्रों के लिए राज्य सरकार द्वारा करोड़ों की राशि आवंटित की जाती है।
संगठन ने आरोप लगाया है कि ठेका प्रथा के माध्यम से छात्रों को घटिया गुणवत्ता का भोजन परोसा जा रहा है। ठेका के तहत सप्लाई किए जा रहे राशन में कीड़े पाए गए हैं और दाल-सब्जी की गुणवत्ता भी खराब है। CG News संगठन की मांग है कि ठेका प्रथा को समाप्त कर राशन की व्यवस्था सीधे अधीक्षकों के हाथों में सौंपी जाए, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।
CG News: एआईएसएफ ने जुलाई 2024 में इसी मुद्दे को लेकर तीन ब्लॉकों में धरना प्रदर्शन किया था और 24 जुलाई को जिला मुख्यालय में रैली निकालकर ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अब तक प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। संगठन ने फिर से कलेक्टर से इस मुद्दे पर तत्काल संज्ञान लेने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
इस मौके पर एआईएसएफ के जिलाध्यक्ष जितेश सोड़ी, एआईवायएफ के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश नाग, जिलाध्यक्ष शैलेन्द्र कश्यप, रामकुमार पोडियाम, मानका सोड़ी सहित कई संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
छात्रावासों में भोजन और अन्य आवश्यकताओं की आपूर्ति के लिए ठेकेदारों से हर महीने प्रति छात्र 50 रुपये का कमीशन लिया जा रहा है। संगठन का आरोप है कि इसमें अनियमितता बरती जा रही है।
Updated on:
24 Sept 2024 04:44 pm
Published on:
24 Sept 2024 04:40 pm
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