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बस्तर में जवानों के लिए आफत बने मच्छर, मलेरिया से CRPF हेड कांस्टेबल की मौत

नक्सल प्रभावित बस्तर में जवानों को जंगलों में जहां नक्सलियों से खतरा बना रहता है वहीं जंगलों में जवानों को दोहरे मोर्चे पर लड़ाई लडऩी पड़ रही है।

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सुकमा

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Ashish Gupta

Oct 22, 2017

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सुकमा. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर में जवानों को जंगलों में जहां नक्सलियों से खतरा बना रहता है वहीं पिछले कई सालों से जवान के लिए मलेरिया जानलेवा भी साबित हो रहा है। जंगलों में जवानों को दोहरे मोर्चे पर लड़ाई लडऩी पड़ रही है।

ताजा मामला 22 अक्टूबर रविवार को देखने को मिला जब सुकमा जिले के चिंतागुफा में पदस्थ सीआरपीएफ 206 बटालियन के हेड कांस्टेबल बरमानंद की मलेरिया की चपेट में आने से मौत हो गई। दरअसल, सीआरपीएफ जवान की रविवार सुबह अचानक तबीयत बिगडऩे लगी। इसके बाद जवान को तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसी बीच जवान ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

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जानकारी के अनुसार जवान की तबीयत पिछले कई दिनों से खराब थी। जवान ने पिछले दिनों बदनदर्द, सिरदर्द और बुखार की शिकायत की थी। उसका इलाज कैंप में चल रहा था। लेकिन शनिवार की रात जवान की हालत ज्यादा बिगड़ गई। दूसरे दिन सुबह होते ही जवान को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत और भी चिंताजनक हो गई। इसी बीच जवान की इलाज के दौरान ही मौत हो गई।

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डॉक्टरों की मानें तो जवान में मलेरिया के गंभीर लक्षण पाए गए, जोकि मस्तिष्क को गंभीर रूप से प्रभावित कर चुका था। इससे उसकी मौत हो गई। जवान मूलत: उत्तर प्रदेश का रहने वाला था। उसकी मौत के बाद उसके शव का पोस्टमार्टक करवाया गया और शव को ससम्मान गृहग्राम भिजवाने की व्यवस्था की जा रही है।

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बस्तर संभाग में मलेरिया से सीआरपीएफ जवान की मौत का यह पहला मामला पहला नहीं है। इससे पहले भी सीआरपीएफ के करीब दर्जनभर से ज्यादा जवान मलेरिया की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं।